जीएसटी पोर्टल पर तकनीकी खामियों को दूर करने की व्यवस्था

पुनः संशोधित बुधवार, 4 अप्रैल 2018 (23:01 IST)
नई दिल्ली। ने पर तकनीकी खामियों के कारण करदाताओं के समक्ष पेश आ रही मुश्किलों को दूर करने के लिए एक आईटी शिकायत निवारण व्‍यवस्‍था शुरू की है। इस संबंध में जीएसटी परिषद ने एक आईटी शिकायत निवारण समिति को यह अधिकार सौंपा है कि वह शिकायत निवारण और करदाताओं को राहत पहुंचाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को मंजूरी देने के साथ-साथ इस बारे में जीएसटीएन को सिफारिश कर सकती है।

इस व्‍यवस्‍था में यह भी उल्‍लेख किया गया है कि यदि किसी करदाता को पोर्टल पर कोई स्‍पष्‍ट खा‍मी नजर आती है, जिस वजह से वह किसी प्रक्रिया को पोर्टल पर पूरा नहीं कर पाता है, तो वह उस बारे में क्षेत्रीय अधिकारियों अथवा प्रमुख अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। आईटी शिकायत निवारण समिति आवश्‍यकता पड़ने पर किसी भी चिह्नित समस्‍या पर गौर करने के साथ ही उसका समाधान भी कर सकती है।

आईटी संबंधी खामी के कारण नियत तिथि तक 'ट्रान-1' को दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाना और डिजिटल हस्‍ताक्षर की प्रक्रिया पूरी न हो पाने या ट्रान-1 का सत्‍यापन पूरा न हो पाना भी इन आईटी खामियों में शामिल हैं। आईटी संबंधी खामियों के कारण इस तरह के ट्रान-1 इत्‍यादि को दाखिल न कर पाने वाले करदाताओं को यह प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी करने की अनुमति होगी। इस तरह के ट्रान-1 के लिए जिस जीएसटीआर 3बी को दाखिल नहीं किया जा सका है, उसे दाखिल करने की प्रक्रिया 31 मई तक पूरी करनी होगी।

ट्रान-1 को दाखिल करने की अंतिम तिथि आमतौर पर नहीं बढ़ाई जा रही है और केवल उन्‍हीं करदाताओं को ट्रान-1 दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति होगी, जिनकी पहचान इस संबंध में जारी सर्कुलर के संदर्भ में की गई है। ट्रान-1 को दाखिल करने संबंधी निर्णय से 17,573 करदाता लाभान्वित होंगे, जो बाद में सीजीएसटी क्रेडिट के रूप में 2582.98 करोड़ रुपए और एसजीएसटी क्रेडिट के रूप में 1112.77 करोड़ रुपए का लाभ उठा पाएंगे। (वार्ता)

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