देशभर में बाढ़ का कहर, लाखों लोग बेहाल

पुनः संशोधित सोमवार, 17 जुलाई 2017 (14:55 IST)
नई दिल्ली। देशभर के कहर से लोग बेहाल हैं। और असम में स्थिति ज्यादा खराब है। इसके अलावा ओडिशा एवं अन्य राज्यों में भी ज्यादा बारिश लोगों के लिए मुश्किल का सबब बनी हुई है।
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गुजरात में भारी बारिश के चलते नदियां उफान पर हैं। बारिश के कारण कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई है। सुरेंद्रनगर जिले के नटवरगढ़ में फंसे 3 लोगों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से रविवार सुबह निकाला गया। वहीं, एयरफोर्स और डिजास्टर मैनेजमेंट की टीम ने 400 से ज्यादा लोगों को बचाया है। हालांकि राज्य के कई हिस्सों, खासतौर पर सौराष्ट्र और कच्छ के इलाकों में बारिश थमी हुई है। ने कहा है कि अगले दो दिनों में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है।
गुजरात से ही लगे राजस्थान के उदयपुर संभाग में कुछ हिस्सों में भारी बारिश हुई है। वहीं जोधपुर, उदयपुर, कोटा, के कई इलाकों और अजमेर, जयपुर, भरतपुर, बीकानेर संभागों के कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई है। शनिवार को राजसमंद में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई।

असम के धेमाजी, लखीमपुर, बिस्वनाथ, दरांग, नलबाडी, बारपेटा, बोंगईगांव, चिरांग, कोकराझार, धुबरी, दक्षिण सल्मारा, ग्वालपाडा, मोरीगांव, नगांव, कार्बी आंगलांग, गोलाघाट, जोरहाट, माजुली, शिवसागर, करीमगंज और कछार जिलों में बाढ़ और भारी बारिश केचलते 12 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। राज्य में मरने वालों की संख्या बढ़कर 60 हो गई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 25 हजार से अधिक लोगों ने कई जिलों में सरकार द्वारा स्थापित 19 शिविरों में शरण ले रखी है। 1500 से ज्यादा गांव पानी में डूब चुके हैं।

ओडिशा के रायगड़ा और कालाहांडी में भी भारी बारिश के चलते अचानक बाढ़ आ गई है। सीएम पटनायक ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी जहां स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। हिमाचल में भी भारी बारिश के चलते कांगड़ा और चंबा में भूस्खलन के कारण कई रास्ते अवरुद्ध हो गए। अन्य जिलों में भारी बारिश के चलते लोग परेशान हैं। जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बारिश की वजह से हुए भूस्खलन के कारण 300 किलोमीटर लंबा जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे कुछ घंटों तक बंद रहा।
...और यह चेतावनी भी : एडीबी और पोस्टडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इंपैक्ट रिसर्च (पीआईके) की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि साल 2050 तक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सालाना बाढ़ के कारण भारी नुकसान वाले शीर्ष 20 देशों की सूची में मुंबई, चेन्नई, सूरत और कोलकाता शीर्ष 13 शहरों में शामिल होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक तापमान बढ़ने से क्षेत्र की मौसम प्रणाली, कृषि, भूमि और समुद्र बायो डायवर्सिटी में भीषण बदलाव आएंगे।

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