दलितों के घर भोज पर भाजपा सांसदों ने उठाए सवाल

नई दिल्ली| Last Updated: शुक्रवार, 4 मई 2018 (10:02 IST)
नई दिल्ली। भाजपा सांसद ने लोगों तक पहुंचने के लिए अपनी पार्टी की ओर से चलाए जा रहे ग्राम स्वराज अभियान पर कहा कि इससे कोई चुनावी फायदा नहीं होगा और यह दलितों को हीन महसूस कराता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले महीने पार्टी के सभी सांसदों और मंत्रियों से कहा था कि वह 50 प्रतिशत से ज्यादा अनुसूचित जाति आबादी वाले गांवों में अपना समय व्यतीत करें। इसके बाद ही 'ग्राम स्वराज अभियान' शुरू किया गया।

उत्तर पश्चिम दिल्ली से सांसद उदित राज ने कई ट्वीट के माध्यम से कहा, राहुल गांधी दलित के घर गए, उनके साथ भोजन किया और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा, उनका भी यही हश्र होगा जो अभी वैसा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'यह मेरा सामाजिक विचार है। मेरी निजी राय हो सकती है। ना सिर्फ पार्टी, बल्कि पूरे देश, सवर्ण समाज को इसके बारे में सोचना चाहिए। अब सिर्फ खाना खाने से कुछ नहीं होगा, यह उन्हें और हीन महसूस कराता है।'

खुद दलित समाज से ताल्लुक रखने वाले उदित राज ने कहा कि उनके विचार पार्टी के खिलाफ नहीं हैं।

उन्होंने ट्वीट किया है, दलितों के घर रात को रूकने और भोजन करने से ना तो दलित परिवार सशक्त होते हैं और न हीं नेताओं को लाभ पहुंचता है, राहुल गांधी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। रात को रूक कर और भोजन करके दिखावा करने से बेहतर है कि नेता जरूरतमंत दलितों के लिए भोजन, कपड़ा, मकान, रोजगार और इलाज का ऊपाय लेकर आएं।

उनका कहना है कि वह पार्टी के आदेश का पालन कर रहे हैं, लेकिन इससे भाजपा को कुछ खास फायदा नहीं होगा।
बहराइच सुरक्षित लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद साध्वी सावित्री बाई फुले ने भी योगी सरकार के ग्राम स्वराज अभियान के तहत गांव-गांव दलितों के घर जाकर नेताओं के समरसता भोज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं का अनुसूचित जाति के घर जाना व उनके बीच खाना-पीना अनुसूचित जाति के लोगों का सबसे बड़ा अपमान है।

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