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वक्त के साथ बूढ़ी होती रही लोकसभा

नई दिल्ली (भाषा)| भाषा|
देश में युवाओं की आबादी भले ही 50 फीसदी से अधिक हो, लेकिन सांसदों की औसत उम्र पर गौर करें तो यह तथ्य उभरकर सामने आता है कि चुनाव-दर-चुनाव लोकसभा में चुनकर आने वाले सांसदों की उम्र बढ़ती जा रही है।

पहली लोकसभा में जहाँ सांसदों की औसत उम्र 46.5 साल थी, वहीं मौजूदा लोकसभा में सांसदों की औसत उम्र 52.63 साल है। पहली लोकसभा में जहाँ सबसे ज्यादा युवा थे, वहीं 13वीं लोकसभा में सबसे उम्रदराज सांसद थे। 13वीं लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 55.5 वर्ष थी।

दूसरी लोकसभा में सांसदों की औसत उम्र पहली लोकसभा की तुलना में थोड़ी बढ़ गई। दूसरी लोकसभा में सांसदों की औसत उम्र 46.7 वर्ष हो गई। तीसरी लोकसभा का गठन 1962 में हुआ। तीसरी लोकसभा में सांसदों की औसत आयु में तीन साल का इजाफा हुआ। उस दौरान सांसदों की औसत उम्र 49.4 वर्ष हो गई।

हालाँकि 1967 में गठित चौथी लोकसभा में सांसदों की औसत आयु में थोड़ी गिरावट आई। इस दौरान सांसदों की औसत आयु 48.7 साल थी। इस दौरान ही कांग्रेस में विभाजन हुआ था और मोरारजी देसाई ने इंदिरा गाँधी के खिलाफ बगावत कर दी थी।

वर्ष 1971 में पाँचवीं लोकसभा का गठन हुआ और इंदिरा गाँधी एक बार फिर सत्तारूढ़ हुईं। पाँचवीं लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 49.2 वर्ष हो गई।

दिलचस्प बात यह है कि छठी लोकसभा में सांसदों की औसत आयु पहली बार 50 साल से ऊपर हो गई, जबकि इसी दौरान युवाओं ने इंदिरा गाँधी सरकार की ओर से लगाए गए आपातकाल के खिलाफ आंदोलन किया था।

सातवीं लोकसभा के चुनाव में इंदिरा गाँधी को सत्ता से बाहर होना पड़ा और केंद्र में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार का गठन हुआ। महज तीन साल में ही जनता पार्टी सरकार का पतन हो गया और देश में एक बार फिर चुनाव कराने पड़े।

वर्ष 1980 में हुए इस चुनाव में एक बार फिर इंदिरा गाँधी सत्ता में आईं। यह लोकसभा पहले की तुलना में अपेक्षाकृत युवा थी। इस लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 49.9 वर्ष थी।

आठवीं लोकसभा ने देश को राजीव गाँधी के रूप में देश का सबसे युवा प्रधानमंत्री दिया, लेकिन निचला सदन उतना युवा नहीं रहा। आठवीं लोकसभा में सांसदों की औसत उम्र 51.4 साल थी।

नौवीं और दसवीं लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 50 साल से अधिक रही। नौवीं लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 51.3 वर्ष थी तो दसवीं लोकसभा में सांसदों की औसत आयु 51.4 वर्ष थी।
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