गुरु नानकदेव के अनमोल दोहे (हिन्दी में)

* जगत में झूठी देखी प्रीत।
 
अपने ही सुखसों सब लागे, क्या दारा क्या मीत॥
 
मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत।>  
अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत॥
 
मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।>  
भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥
 
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