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'सेवा दिल्ली' के यूथ फेस्टिवल में स्लम की लड़कियों ने दिखाया हुनर

Author अर्चना शर्मा|
बदलते जमाने के साथ आज ऐसा कोई भी काम नहीं है जो लड़कियां नहीं कर सकतीं। अगर लड़कियां अपने मन में ठान ले तो वे बड़े से बड़े काम को आसानी से कर सकती हैं। यह बात चर्चित थियेटर डाइरेक्टर कलाकार ने 'सेवा दिल्ली' की ओर से आयोजित कार्यक्रम 'यूथ फेस्टिवल' में कही। बतौर मुख्य अतिथि शामिल सुहेला ने मलीन बस्तियों से आई सैकड़ों लड़कियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि अगर कोई भी लड़की थियेटर के क्षेत्र में अपना बनाना चाहे तो वह उन लड़कियों की हरसंभव मदद करेंगी। इसके साथ ही कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल वरिष्ठ कलाकार कमलेश गिल ने भी इन लड़कियों की तारीफ करते हुए कहा कि ये बच्चियां हमारे कल का भविष्य हैं। और आज ये लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी बराबरी कर रहीं हैं।  
'सेवा दिल्ली' की ओर से आयोजित '2016  का यह कार्यक्रम दिल्ली के सिविल लाइन के शाह आडिटोरियम में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में मलीन बस्तियों से आई लड़कियों ने हिस्सा लिया। लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें जागरुक करने के मकसद से आयोजित कार्यक्रम में लड़कियों के अभिभावकों ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। उन्हें तो उम्मीद ही नहीं थी कि उनकी बेटियां इस तरह के मंच पर दमदार प्रर्दशन कर सकती हैं। 
 
'सेवा दिल्ली' हर साल अपनी किशोरियों का आगे बढ़ाने व उनमे आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए यह कार्यक्रम करता आ रहा हैं और इसी क्रम में आज इस चौथे यूथ फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इस यूथ फेस्टिवल में दिल्ली के आठ मलीन बस्तियों से जिसमें न्यू अशोक नगर, सुन्दर नगरी व जहांगीर पूरी से आई किशोरियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। 
 
कार्यक्रम को दो भागो में किया गया। पहले भाग में लड़कियों के बीच कुछ प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। मेहंदी,स्पीच व चित्रकारी में जज का दिल जीतने वाली इन लड़कियों को ट्राफी और प्रमाण पत्र देकर इनकी हौसला अफजाई की गई । 
 
दूसरे भाग में सभागार में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत हुई...  सत्यम शिवम सुंदरम गीत पर बेहतरीन नृत्य के साथ। जिसे प्रस्तुत किया भावना और सरिता ने।। इन दोनों की युगलबंदी ने जो समां बांधा वह कार्यक्रम के अंत तक बना रहा। सुंदर नगरी से आईं दर्जन भर बच्चियों ने घर याद आता है मुझे विषय पर गीत की प्रस्तुति दी। घर और बचपन से जुड़ी खट्टी-मीठी अनुभवों की याद दिलाते हुए इस गाने ने सभागार में उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। अक्सर महिलाओं के सामने दोहरी जिम्मेदारी होती है एक घर की और दूसरे घर से बाहर की।। जिसे नाटक के जरिए पर्दे पर उतारा मलीन बस्तियों से आई लड़कियों ने। इस  नाटक के जरिए ये बताने की कोशिश की गई कि किस तरह महिलाएं इन परेशानियों से दो चार होती हैं बावजूद इसके उन्हें वह सम्मान नहीं मिल पाता जिसकी वो वास्तविक हकदार हैं..
 
'सेवा' का मकसद अपनी महिला कामगारों को स्वावलंबी बनाना हैं इसी को ध्यान में रखते हुए इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा ,मलीन बस्तियों की इन लड़कियों का स्टेज पर फैशन शो कैट वॉक। इन लड़कियों ने  अपने हाथों से इन कपड़ों को बनाया हैं जब इन्हें पहन कर वह रैंप पर गई  तो पूरा आडिटोरियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इनकी आंखों से झलकता आत्मविश्वास बता रहा था कि अब हमे अपने सपनों का आकाश छूने से कोई नहीं रोक सकता हैं। इस कैटवॉक में लड़कियों ने अपनी-अपनी ख्वाहिशों को अपने-अपने परिधानों के माध्यम से सबके सामने रखा। अपने तरह का यह अनूठा कैटवॉक था जिसमें लड़कियों ने खुद से सिले हुए कपड़े पहने थे.. 'यूथ फेस्टिवल' के इस चौथे वार्षिकोत्सव में लड़कियों ने पंजाबी और हिंदी गानों पर शानदार प्रस्तुति दी जिसे सभी लोगों ने खूब सराहा।
 
इसी अवसर पर युएनडीपी  से आई कांता जी ने अपने संबोधन में 'दिशा' नामक प्रोजेक्ट के बारे में सभी को जांनकारी दी जो स्लम में रह रही इन लड़कियों को उनके करियर व आने वाले भविष्य को चुनने में अहम रोल निभाएगा। प्रोजेक्ट सेवा और युएनडीपी व अन्य भागीदारों के सहयोग से चलाया जाएगा। 'यूथ फेस्टिवल'  के इस आयोजन की एक और अहम बात थी वह यह की इस कार्यक्रम में उन तीन लड़कियों ने भी हिस्सा लिया हैं जिनको 'सेवा' ने 'जिंदल स्टील' से मिलकर वेल्डिंग का प्रशिक्षण दिया हैं, और आज वह अपने पैरों पर खड़ी हैं।   
 
 और इसी अवसर पर सेवा ने अपने अहम कार्यक्रम '2016 को भी अंत में लांच किया। जिसमें कॉलेज में पढ़ रही लड़कियों को स्लम की इन बच्चियों से जोड़ा जाएगा। जो उन्हें शैक्षिक ,बौद्धिक ,मानसिक , विकास में सहायता प्रदान करेंगी।
 
कार्यक्रम में शिरकत कर रहीं सेवा की प्रमुख रेहाना झाबवाला ने कहा कि अब वक्त बदल रहा है, और इसी बदलते वक्त की मांग है कि लड़कियां स्वयं के भविष्य के लिए जागरुक बनें। अपने अधिकार को पहचाने.. कार्यक्रम में शामिल 'सेवा दिल्ली' के निदेशक संजय कुमार ने इन लड़कियों से अपील की कि वे कभी हिम्मत ना हारें.. रास्ते में मुश्किलें तमाम आती हैं जिनका डटकर सामना करने से ही विजय मिलती है। उन्होंने बताया कि 'सेवा दिल्ली' की यह कोशिश रहती है कि समाज में महिलाओं खासकर लड़कियों को बराबर की हिस्सेदारी मिले। 
 
आखिर में कार्यक्रम का समापन ' सेवा दिल्ली' की कॉआर्डिनेटर नमिता मलिक ने सभी का आभार मानकर किया। 
 
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