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रीमा लागू : सर से उठा ममता का आंचल

Author प्रीति सोनी|


खबर दुखद है, लेकिन यकीन करने लायक बिल्कुल भी नहीं, कि छोटे एवं बड़े पर्दे पर ममतामयी मां और का किरदार निभाने वाली रीमा लागू जी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। यकीन के लायक इसलिए नहीं कि कोई दिल उनसे यूं बिछड़ना नहीं चाहता, जिस तरह से वो हाथ छुड़ाकर चली गईं, जैसे एक मां बच्चे को बहलाकर हाथ छुड़ाती है। बरसों से उन्हें इन जाने पहचाने किरदारों में देखते आ रहे हैं, और अब सिर्फ आंखों को ही नहीं मन को भी उनकी आदत हो गई थी...ऐसी आदत, जिसे हम बदलना नहीं चाहते...जिसकी जगह कोई और चेहरा कभी भाया ही नहीं। 
 
ममता के अमृत से भीगी आंखें, और चेहरे की वह आभा...किसी को भी उनसे प्यार करने पर मजबूर कर दे। हर बेटा उनमें अपनी मां की छवि देखता और हर बेटी ऐसी सास की कामना करती होगी, जिस तरह के किरदार उन्होंने निभाए। उनके द्वारा जितनी भी फिल्में की गईं, अगर उनकी जगह किसी अन्य अभिनेत्री को रख कर देखें, तो शायद ही कोई उन्हीं भावों के साथ उन किरदारों को उनसे बेहतर निभा पाए। मिश्री सी बोली के साथ मन मोहता चेहरा उनकी पहचान भी रही और हमारे दिलों में उनकी पैठ बनाने का प्रमुख कारण भी। क्योंकि अभिनय में ही नहीं, असल जिंदगी में भी वे अपने इस गुण से आसपास के वातावरण को महकाए रखती थीं।
 
हिन्दी के साथ-साथ मराठी पर्दे पर भी उन्होंने अनेक किरदार निभाए और दर्शकों के बीच हमेशा चहेती रहीं। श्रीमान श्रीमति और तू-तू मैं-मैं जैसे कार्यक्रम हों या फिर मैंने प्यार किया, हम आपके हैं कौन, हम साथ-साथ हैं जैसी यादगार फिल्में...उनका किरदार आज भी आंखों के सामने सजीव है। वे हमारे दिल-ओ-दिमाग में आज भी इतनी सजीव हैं, कि उनके न होने पर यकीन करना मुश्किल ही नहीं नामुम्किन सा लगता है। मां का आंचल किसे प्यारा नहीं लगता, वहां से जितना प्रेम समेटा जाए कम है। शायद इसलिए ही मन आज भी उस आंचल से अलग नहीं होना चाहता...जो अचानक किसी तेज हवा के झोंके से उड़कर हमसे दूर चला गया है। रीमा जी भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी यह ममतामयी छवि सदैव हमारे मन में बसी रहेगी।
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