भारत में अंडर-17 फीफा विश्व कप 6 अक्टूबर से



फुटबॉल का खुमार

-मनीष कुमार जोशी
भारत में क्रिकेट का खुमार तो हमेशा ही रहता है लेकिन अक्टूबर महीने में पूरा भारत फुटबॉल के फीवर से पीड़ित रहेगा, क्योंकि भारत में पहली बार हो रहा है। भारत इस बार अंडर-17 फुटबॉल फीफा विश्व कप की मेजबानी कर रहा है।
पहली बार भारत में इतना बड़ा फीफा का आयोजन हो रहा है तो खेल की खुमारी तो छाएगी ही। मेजबान होने के नाते भारत भी इसका हिस्सा है और यह अपने आप में रोमांचित करने वाला है कि फीफा विश्व कप में भारतीय खिलाड़ी भी अपने पैर दौड़ाएंगे।

एशिया में फुटबॉल को विकसित करने के प्रयासों के तहत फीफा ने अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी भारत को दी है। इसकी मेजबानी के प्रयासों में भारत के अलावा अजरबेजान, आयरलैंड और उज्बेकिस्तान भी शामिल थे लेकिन 15 नवंबर 2015 को भारत के पक्ष में फैसला हुआ और भारत को यह अवसर प्राप्त हुआ।

भारत को मेजबानी मिलने के साथ ही इसके आयोजन और प्रचार का काम शुरू हुआ। अंडर-17 टीम को विश्व कप के लिए तैयार करने के लिए जुट गए हैं। एक टीम जिसने कभी फीफा विश्व कप के लिए क्वालीफाई तक नहीं किया हो उसके लिए सीधे प्रतियोगिता में उतरना एक चुनौती होता है।

फीफा नियमों के अनुसार अंडर-17 विश्व कप के लिए 6 परिसंघों की मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता में पहले 4 स्थानों पर रहने वाली टीम क्वालीफाई करती है। एशिया से अंडर-16 एएफसी चैंपियनशिप में से 4 टीमें क्वालीफाई करती हैं। लेकिन अंडर-17 विश्व कप शुरू होने के बाद से भारत कभी भी इस प्रतियोगिता में प्रथम 4 में स्थान नहीं बना पाया था। इस बार मेजबान होने के नाते भारत को सीधे विश्व कप खेलने का अवसर मिला है।

भारतीय युवा अंडर-17 विश्व कप फुटबॉल को लेकर काफी उत्साहित हैं। 6 से 28 अक्टूबर तक खेलप्रेमी इस आयोजन का लुत्फ उठाएंगे। प्रतियोगिता के पहले दौर में सबकी नजरें भारत पर टिकी रहेंगी। भारत को यूएसए, कोलंबिया और घाना के साथ ग्रुप ए में रखा गया है। एक ग्रुप से 2 टीमें सीधे और एक टीम अच्छे प्रदर्शन के आधार पर नॉकआउट दौर में प्रवेश करेगी।

भारतीय ग्रुप में भारत को छोड़कर बाकी तीनों टीमों का अंडर-17 विश्व कप में रिकॉर्ड शानदार रहा है। घाना 1991 से लेकर 1999 तक अंडर-17 फीफा चैंपियनशिप में छाया रहा है। 1991 और 1993 में चैंपियन, 1995 और 1997 में उपविजेता तथा 1999 में तीसरे स्थान पर रहा है।

कोलंबिया 2003 व 2009 में तथा यूएसए 1999 में चौथे स्थान पर रह चुका है, वहीं भारत इस प्रतियोगिता के लिए कभी क्वालीफाई ही नहीं कर पाया। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत के लिए मुकाबला कितना मुश्किल है।

भारतीय टीम के कोच लुईस मेटोस मानते हैं कि भारत के लिए नॉकआउट दौर में पहुंचने की संभावना मात्र 5 फीसदी है। मार्च में टीम के कोच बनने वाले मेटोस किसी अप्रत्याशित परिणाम की संभावना से इंकार नहीं करते है, क्योंकि फुटबॉल में भी किसी मैच की पूर्व भविष्यवाणी करना जोखिम का काम है।

भारत के लिए अधिकांश बातें नकारात्मक होने के बावजूद भारत में इस विश्व कप को लेकर जबरदस्त उत्साह है और इस बात से लोग ज्यादा उत्साहित हैं कि भारत की कोई टीम पहली बार फीफा विश्व कप में खेल रही है। देशवासियों को उम्मीद है कि टीम को देश में खेलने का लाभ मिलेगा और अप्रत्याशित तरीके से टीम अच्छा प्रदर्शन करते हुए नॉकआउट दौर में प्रवेश करेगी।

टीम ने साल के शुरू में यूरोप का दौरा किया था। वहां प्रदर्शन ठीक नहीं तो खराब भी नहीं रहा। टीम ने बेलारूस और एस्टोनिया के विरुद्ध संघर्षपूर्ण मैच खेला। इजिप्ट में टीम ने 2 मैच जीते और 1 बराबरी पर खेला। इटली में 1 भी मैच नहीं हारा। लाजियो कप में 2 मैच जीते और 2 बराबरी पर खेले। मैक्सिको सिटी ने चिली से बराबरी पर खेला।

कुल मिलाकर भारत के प्रदर्शन में सुधार देखने को मिल रहा है। इस साल अंडर-17 सैफ कप फुटबॉल चैंपियनशिप जीतना भी उपलब्धि मानी जाएगी। इससे पहले 2013 में भी भारत यह चैंपियनशिप जीत चुका है। विश्व कप में अपने ग्रुप की टीम कोलंबिया के साथ भी हाल ही में 1 मैच खेल चुका है, हालांकि इस मैच में भारत को 3-0 से हार मिली।

टीम के कोच लुईस मेटोस को कार्यभार संभालने को ज्यादा वक्त नहीं हुआ है और टीम के घरेलू परिस्थितियों में खेलने को वे कोई ज्यादा लाभकारी नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि वे टीम के लिए बेहतरीन प्रयास करेंगे।

सीनियर टीम के कप्तान और भारत के स्टार खिलाड़ी सुनील छेत्री का मानना है कि मैदान में फीफा रैंकिंग कोई मायने नहीं रखती है। मैदान में वही टीम जीतती है, जो अच्छा खेल दिखाती है, न कि जिसकी रैंकिंग अच्छी हो वो।

भारत की टीम काफी प्रतिभाशाली है और यह अच्छी बात है कि भारतीय टीम में 9 खिलाड़ी छोटे से राज्य मणिपुर से हैं। टीम के कप्तान सुरेश सिंह भी मणिपुर से हैं और वे अब तक 6 गोल कर चुके हैं। टीम इटली और पुर्तगाल में अच्छा प्रदर्शन करके आई है जिससे टीम का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है।

टीम के मैच को यूएसए, 9 अक्टूबर को कोलंबिया और 12 अक्टूबर को घाना से नई दिल्ली में होंगे। इन्हीं मैचों से तय होगा कि भारत नॉकआउट के लिए क्वालीफाई करेगा या नहीं? भारत सहित इस प्रतियोगिता में कुल 24 टीमें भाग ले रही हैं। इन टीमों को 4-4 के 6 ग्रुपों में बांटा गया है। प्रत्येक ग्रुप में पहले 2 स्थान पर रहने वाली टीम सीधे नॉकआउट दौर में प्रवेश करेगी वहीं तीसरे स्थान पर रहने वाली सर्वश्रेष्ठ 4 टीम अगले दौर में जाएगी।
मैच नई दिल्ली, नवी मुंबई, गोवा, कोच्चि, गुवाहाटी और कोलकाता में खेले जाएंगे। कोलकाता के साल्टलेक स्टेडियम में 28 अक्टूबर को फाइनल खेला जाएगा। नाइजीरिया इस प्रतियोगिता की सबसे मजबूत टीम है। नाइजीरिया 5 बार यह खिताब जीत चुकी है और 3 बार उपविजेता रह चुकी है। गत 2 प्रतियोगिताओं में नाइजीरिया चैंपियन है। घाना भी 2 बार चैंपियन रह चुका है। यह तो साफ है कि इसमें अफ्रीकी टीमों का दबदबा रहता है। एशिया की ओर से अब तक कतर, बहरीन और ओमान 1-1 बार चौथा स्थान प्राप्त कर चुके हैं।

भारत पहली बार इसमें भाग ले रहा है। भारत इस विश्व कप में कैसा प्रदर्शन करता है, यह कोई ज्यादा मायने नहीं रखता है लेकिन फीफा विश्व कप के भारत में होने से भारत के खेल परिदृश्य पर दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेंगे। सबसे ज्यादा फर्क भारत के फुटबॉल जगत पर पड़ेगा। विश्व कप के खेलने के बाद खिलाड़ियों का मनोबल आकाश को छुएगा और फुटबॉल के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।

इस विश्व कप के मद्देनजर फुटबॉल के आधारभूत ढांचे को सुधारा गया है, स्टेडियमों को तैयार किया गया है, विश्व कप की तैयारी के लिए भारतीय टीम को यूरोप व अन्य दौरों पर भेजा गया। टीम के लिए विशेष कैंप लगाए गए। इसके अलावा विश्व कप के प्रचार-प्रसार से इस खेल के प्रति जागरूकता आएगी।
एक ऐसा देश जहां क्रिकेट को धर्म माना जाता है, वहां फुटबॉल के प्रति दीवानगी पैदा करना एक चुनौती है। लोगों में इस बात को लेकर ज्यादा उत्साह है कि भारतीय टीम फीफा विश्व कप में खेल रही है। हर एक भारतीय का सपना है कि फुटबॉल में भारतीय टीम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक दिखाए लेकिन भारतीय फुटबॉल टीम की फीफा रैकिंग 100 के आसपास रहती है।

गत दशक में बाइचुंग भूटिया और सुनील छेत्री ने अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है लेकिन टीम अभी तक एशिया से बाहर निकलने में सक्षम नहीं हो पा रही है। यह विश्व कप भारत में फुटबॉल के स्तर को निश्चित रूप से सुधारेगा।
भारत में फीफा अंडर विश्व कप आयोजित होना अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के नए द्वार खोलेगा। भारतीय फुटबॉल संघ इससे उत्साहित होकर फीफा की दूसरी प्रतियोगिताओं के लिए भी मेजबानी प्रस्तुत करना चाहता है।

फीफा पिछले 1 दशक से भारत पर नजर बनाए हुए है और फुटबॉल को विकसित करने की फीफा की कई योजनाएं भारत में चल रही हैं। फीफा भारत में भरपूर प्रचार-प्रसार भी कर रहा है। यही कारण है कि फीफा अंडर विश्व कप की खुमारी अब सिर चढ़कर बोल रही है और आने वाले दिनों में भारत फुटबॉल के फीवर से पीड़ित रहेगा।

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