आलेख | योगासन
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आसन परिचय : ध्यान के लिए उपयुक्त आसनों में पद्मासन महत्वपूर्ण है। पद्म अर्थात कमल, इसलिए इस आसन को कमलासन भी कहते हैं। इससे रक्त संचार तेजी से बढ़कर उसमें शुद्धता आती है तथा यह पैरों को लचिला, लेकिन मजबूत बनाता है।

आसन विधि : यह आसन बैठकर किया जाता है। पहले पैर लंबे कर आपस में सटा लें फिर बाएँ हाथ से दाएँ पैर का अँगूठा पकड़कर दाहिने पैर को बाएँ पैर की जंघा पर रख दें। फिर बाएँ पैर को ऊपर की दाहिनी जंघा पर स्थापित करें। ‍तब दोनों हाथ की कलाइयाँ घुटनों पर सीधी रखें। दोनों हाथ अँगूठे के पास वाली अँगुली अँगूठे से मिलाएँ, बाकी तीन अंगुलियाँ सीधी रखें। आँखें बंद तथा रीढ़ की हड्डी सीधी रखें। गर्दन सीधी तथा नासाग्र दृष्टि बनाए रखें अथवा भृकुटी पर चित्त को एकाग्र करें। यह समस्त दुर्भावनाओं का विनाशक पद्मासन कहा जाता है।

आसन के लाभ : 'इदं पद्‍मासन प्रोक्तंसर्वव्याधि विनाशनम्'- अर्थात पद्मासन समस्त व्याधियों को नष्ट करता है। समस्त व्याधियों से अभिप्राय दैहिक, दैविक और भौतिक व्याधियों से है। पद्मासन में प्राणायाम करने से साधक या रोगी का चित्त शांत होता है। साधना और ध्यान के लिए यह आसन श्रेष्ठ है। इससे चित्त एकाग्र होता है। चित्त की एकाग्रता से धारणा सिद्ध होती है।

पद्‍मासन से पैरों का रक्त-संचार कम हो जाता है और अतिरिक्त रक्त अन्य अंगों की ओर संचारित होने लगता है जिससे उनमें क्रियाशीलता बढ़ती है। यह तनाव हटाकर चित्त को एकाग्र कर सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। छाती और पैर मजबूत बनते हैं। वीर्य रक्षा में भी मदद मिलती है। नियमित अभ्यास से पेट कभी बाहर नहीं निकलता।

सावधानी : पैरों में किसी भी प्रकार का अत्यधिक कष्ट हो तो यह आसन न करें। साइटिका अथवा रीढ़ के निचले भाग के आसपास किसी प्रकार का दर्द हो या घुटने की गंभीर बीमारी में इसका अभ्यास न करें।
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