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व्यर्थ के स्खलन से बचें
शीघ्रपतन और स्वप्नदोष का निदान
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
स्वप्न दोष या ‍शीघ्रपतन के कारण अधिकांश युवक इस रोग से परेशान हैं और अधिकांश को मालूम ही नहीं कि ये किस किस्म का रोग है। दोनों ही रोगों का मूल कारण संभोग की कल्पना और स्नायु दुर्बलता माना गया है। इसके अलावा भी कई कारण हैं। इसका निदान भी बहुत सरल है।

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स्वप्नदोष : जैसा कि इसका नाम ही है स्वप्न दोष अर्थात जब व्यक्ति किसी भी प्रकार के संभोग की कल्पना करता है तो अकसर रात में उसे संभोग के सपने सताते हैं। ऐसा तब भी होता है जबकि व्यक्ति गर्म वस्तुएँ जैसे अंडा, माँस, मछली, तली-भुनी चीजें, अत्यधिक चाय या कॉफी, सिगरेट या अन्य तरह के व्यसन का सेवन करता है।

यदि इस रोग पर ध्यान न दिया ‍गया तो सिरदर्द, चक्कर और मानसिक तथा शारीरिक कमजोरियों के लक्षण उबरने लगते हैं। आगे चलकर स्नाविक दुर्बलता, धातु दुर्बलता और अंततः व्यक्ति नपुसंक रोग से ग्रस्त हो जाता है। पहले स्वप्न के ‍फिर बिना स्वप्न के ही वीर्य स्खलन होने लगता है।

शीघ्रपतन : शीघ्रपतन का अर्थ है स्त्री के यौन सुख प्राप्त करने के पहले ही पुरुष का शीघ्र ही स्खलित हो जाना। दरअसल पुरुष के तुरंत ही उत्तेजित हो जाने के कारण वह तुरंत ही स्खलित हो जाता है।

दूसरा कारण स्वप्नदोष, धातु दुर्बलता और स्नायु दुर्बलता है। उक्त रोग के कारण भी शीघ्रपतन की शिकायत बनी रहती है। दरअसल इस रोग में व्यक्ति के भीतर संयम की शक्ति पूरी तरह से क्षीण हो जाती है। स्त्री द्वारा यौन सुख के लिए तैयार होने तक वह स्वयं को संयमित करने के प्रयास अवश्य करता है किंतु असफल रहता है।

उपचार :
पहले तो उपरोक्त बताए गए कारणों को समझें और भोजन में परिवर्तन कर दें। अनियमित जीवनशैली को त्याग दें। तेज धूप, धूल और धुएँ से बचें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। इस दौरान नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे के लिए योग-निद्रा करें, तब पाँच मिनट का ध्यान करें। खुली और ताजी हवा में प्राणायाम करें। गहरी श्वास लेने और छोड़ने से रक्त प्रवाह बढ़ेगा और वायुदोष मिटेगा।

विशेष आहार :
शहद तथा भीगे हुए बादाम या किशमिश को दूध में मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीएँ। 8-10 बादाम, 25 दाने किशमिश तथा 7-8 मनुक्के भिगोकर नाश्ते में ले सकते हैं। हरी सब्जी और छिलकों वाली दाल का उपयोग पतली चपाती के साथ करें। चपाती मक्खन या मलाई के साथ लें। भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग और प्याज, लहसुन तथा अदरक का संतुलित सेवन करें।

योग पैकेज :
नियमित योगासनों का अभ्यास और प्रतिदिन आधे घंटे योग-निद्रा करना इसकी मुख्य चिकित्सा है। योगासनों में प्रारंभ में कमर चक्रासन, जानुशिरासन, सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, हलासन, हस्तपादोत्तनासन, योगमुद्रा, पवनमुक्तासन तथा मकरासन करें। फिर धीरे-धीरे खुली और स्वच्छ हवा में नाड़ी शोधन प्राणायम का अभ्यास करें। तब कपालभाँति तथा भ्रामरी का अभ्यास करें। बंधों में उड्डियान बंध लगाएँ। सप्ताह में एक बार तेल मालिश अवश्य कराएँ। यह सब करें किसी योग्य योग चिकित्सक की सलाह पर।
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