ब्रिटेन के इतिहास में क्वीन के बाद अगर कोई महिला सशक्त राजनीति और दृढ़ इरादों के लिए चर्चा में रही है तो वह है मारग्रेट हिल्डा थेचर। थेचर वह हस्ती हैं जिसका नाम ब्रिटेन के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है, चाहे वह आर्थिक नीतियों से संबंधित फैसले हों या फिर फॉकलैंड युद्ध।
वे एक लौह-महिला के रूप में जानी जाती रही हैं। ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव प्राप्त करने वाली थेचर ने लगातर तीन बार प्रधानमंत्री पद संभालने का गौरव भी प्राप्त किया है। आज वही लौह महिला स्मृतिभ्रंश के दंश से ग्रसित है और कई बार यह भी भूल जाती है कि वह मारग्रेट थेचर हैं!
पिछले लगभग 8-9 सालों से मारग्रेट 'डिमेन्शिया' (स्मृतिभ्रंश) की चपेट में हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से पहले रसायनशास्त्र और फिर वकालत पढ़ने वालीं मारग्रेट ने अपनी कठोर छवि तथा बुद्धिमत्ता से अपने लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त किया। कंजरवेटिव पार्टी से चुनाव लड़ने वाली इस घोर अनुशासित तथा कड़े फैसले लेने वालीं महिला के समकालीन भी उनकी शख्सियत से खासे प्रभावित रहे।
उनके साहसिक (और कई बार विवादास्पद भी) फैसलों के कारण उन्हें जनता की नाराजगी का सामना भी करना पड़ा, लेकिन अंततः अपने कूटनीतिक फैसलों से उन्होंने जनता का विश्वास पुनः प्राप्त कर लिया। भले ही उनका रवैया घोर पूँजीवादी तथा कट्टर दक्षिणपंथी सोच वाला रहा हो, लेकिन जनता ने उन्हें तीन बार (1979-1990) प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी।
यह कहीं उनकी काबिलियत का भी प्रमाण है कि क्वीन ने उन्हें "बैरोनेस थेचर" की उपाधि दी। यही लौह-महिला आज समय के आगे झुक गई है। पिछले दिनों मारग्रेट की बेटी कैरल के लिखे संस्मरणों की पुस्तक प्रकाशित हुई है जिसमें उन्होंने मारग्रेट की याददाश्त पर होने वाले आघातों के बारे में लिखा है। "अ स्विम-ऑन पार्ट इन द गोल्डफिश बोल" नामक इस पुस्तक में कैरल ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर मारग्रेट की बीमारी को जाहिर किया है।
इससे पूर्व लोगों के बीच इससे संबंधित अफवाहें अवश्य थीं, लेकिन अब यह सच्चाई खुलकर सामने आ गई है। कैरल लिखती हैं- पिछले 75 सालों में मैंने माँ को कभी इस तरह देखने की कल्पना भी नहीं की थी। वे इस्पात जैसी कड़क और अनुशासित रही हैं। मैंने उन्हें अपने अब तक के जीवन में कभी हार मानते या झुकते नहीं देखा। इसलिए अब उनका स्मृतियों के बंद पन्नों में इस तरह खो जाना दुख देता है।
वे बात करते हुए अचानक शब्दों से जूझने लगती हैं। वे यह भूल जाती हैं कि उन्होंने सुबह अखबार में क्या पढ़ा या नाश्ते में क्या खाया। टीवी पर किसी घटना का समाचार देखते ही वे फौरन उसके बारे में तफ्तीश करने के लिए फोन की तरफ जाती हैं यह भूलकर कि अब यह उनका काम नहीं है।
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सबसे दुखद बात यह है कि वे अपने पति की मृत्यु के बारे में भी भूल चुकी हैं और मुझे भारी दिल से उन्हें कई बार इसके बारे में बताना पड़ा है। वे हर बार इसे जानकर दुख में डूब जाती हैं और फिर एक गहरी साँस लेकर पूछती हैं- 'क्या हम लोग उस समय उनके साथ थे?' यह किसी सदमे से कम नहीं है। गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री के पति डेनिस थेचर का पैंक्रियाटिक कैंसर के चलते 2003 में ही निधन हो चुका है।
कैरल के अनुसार मारग्रेट के स्मृतिभ्रंश से ग्रसित होने की जानकारी उन्हें तब मिली, जब सन् 2000 में पहली बार उन्होंने मारग्रेट को बोलते समय शब्दों से जूझते देखा। बकौल कैरल उस दिन लंच के समय "फॉकलैंड युद्ध" के बारे में चर्चा करते हुए मारग्रेट सहसा किसी और घटना से इस विषय को जोड़ने लगीं। ऐसा लग रहा था, मानो उन्हें बात करने के लिए शब्द खोजने में भारी मशक्कत करना पड़ रही हो।
वे बेहद असमंजस में आ गईं। कैरल उनकी ऐसी स्थिति देखकर सदमे में आ गईं, क्योंकि उनके अनुसार याददाश्त के मामले में मारग्रेट हमेशा किसी वेबसाइट की तरह रहीं। उन्हें एक बार जो बात कही जाती थी, वह उनके स्मृति कोष में हमेशा के लिए दर्ज हो जाती थी इसलिए उनकी इस हालत की कल्पना भी करना मुश्किल था।
उसके बाद से मारग्रेट यादों के इस भँवर में उलझती ही चली गईं। उन्हें इसके 'अटैक' आने लगे। वे कई बार बात करते-करते अपने पुराने दिनों को जीने लगतीं और उसी समय के प्रश्न करने लगतीं, जैसे- मेरी गाड़ी मुझे लेने कब आ रही है या मेरा हेयर ड्रेसर अब तक आया नहीं?
उनके ड्राइवर ने उन्हें उस गली के सामने से ले जाना छोड़ दिया जिसके सामने से दस डाउनिंग स्ट्रीट (प्रधानमंत्री निवास) का रास्ता जाता है, क्योंकि यहाँ से गुजरते ही मारग्रेट को आश्चर्य होने लगता कि ड्राइवर उन्हें प्रधानमंत्री निवास की ओर क्यों नहीं ले जा रहा है?
चौरासी वर्षीय मारग्रेट को स्वास्थ्यगत कारणों के चलते उनके पति की मृत्यु के पूर्व ही डॉक्टरों ने सार्वजनिक बयान देने से बचाने की सलाह दे दी थी। हालाँकि इस बीच ये बातें चर्चा में थीं कि वे कई अटैक्स से गुजर चुकी हैं, लेकिन इन्हें आम नहीं होने दिया गया था। असल में डिमेन्शिया एक ऐसी अवस्था है जिसमें किसी व्यक्ति का दिमाग सुचारु रूप से काम करना बंद कर देता है।
आमतौर पर बढ़ती उम्र के साथ सभी की याददाश्त कुछ कम होने लगती है, लेकिन डिमेन्शिया के मरीज ऐसी स्थिति में आ जाते हैं कि उन्हें रोजमर्रा की बहुत छोटी तथा सामान्य बातें भी याद नहीं रह पातीं। मसलन वे कपड़े कैसे पहनना है तथा खाना कैसे खाना है, यह भी भूल जाते हैं। इससे बचाव तो नहीं हो सकता, लेकिन इसका इलाज संभव है।
सबसे बड़ी बात यह कि डिम्नेशिया के मरीजों के साथ धैर्य से पेश आना जरूरी है। आप जानते हैं कि वह अपनी इच्छा से यह सबकुछ नहीं कर रहा बल्कि यह उसके दिमाग में पैदा हुई उलझन है। इसलिए उसे सहयोग, साथ और सकारात्मक माहौल देना जरूरी है। साथ ही उसकी बार-बार एक ही सवाल करने की प्रवृत्ति पर भी खीजने और चिढ़ने की बजाय उसे समझने की कोशिश करें। जैसे कि मारग्रेट के साथ किया जा रहा है।
बकौल कैरल, उन्होंने जब अपनी माँ की स्थिति को समझा तो वे खुद ही धैर्य रखना सीख गईं। उन्होंने मारग्रेट के सवालों का बिना खीजे बार-बार जवाब देना सीखा। इसके अलावा मारग्रेट के विश्वासपात्र सेवक तथा सहयोगी भी इस बात का ध्यान रखते हैं कि वे बीमार हैं और उनका ध्यान रखना जरूरी है बजाय उनसे बचने या उनका मजाक बनाने के।
एक उच्च पद तथा सत्ता से जुड़े अधिकारी किसी भी व्यक्ति को गर्व का अहसास दिलाते हैं। कुछ लोग इसका उपयोग स्वयं के सुखों के लिए करते हैं तो कुछ जनता के हितों के पोषण हेतु। अंतत: कोई भी पद आपके साथ जीवनभर नहीं रहता। आपके पद और ऐश्वर्य के अंदर तो वही हाड़-माँस का शरीर है, जो समाज के सबसे निजले पायदान पर रहने वालों के पास होता है।
प्रकृति इस मामले में कोई भेदभाव नहीं करती। यही कारण है कि अंतत: प्रकृति के नियमों की जद में सभी समान हो जाते हैं चाहे वह राजा हो या रंक। मारग्रेट थेचर इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सर्वोच्च पद और अथाह धन भी आपको उन बेहद साधारण चीजों से नहीं बचा सकता, जो प्रकृति आपके लिए तय करती है।
शायद यही मानव स्वभाव है कि वह या तो इस बात को नहीं जानता और जानता भी है तो समझना नहीं चाहता। अगर ऐसा नहीं होता तो शायद पूरी पृथ्वी साधारण मनुष्यों से खाली हो जाती, फिर यहाँ केवल उच्च विचार और मोह-माया से परे संत ही दिखाई देते।