| | विवाह के पूर्व कुछ ना छुपाएँ | | | विश्वास से बनते है रिश्ते | | | | | | | | |
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| - अनन्या रथ पैंतीस वर्षीय मिथुन के लिए जब सोनम का रिश्ता आया तो परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बन गईं कि मिथुन के घरवाले सोनम और उसके परिवार के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं ले पाए। मिथुन के पिता बिस्तर पर थे और उसकी शादी उनकी आखिरी इच्छा थी। उधर सोनम के पिता नहीं थे और उसके भाई ने मिथुन के घरवालों को इस तरह से भावनात्मक जाल में घेरा कि वे जब तक समझ पाते, तब तक सोनम की बड़ी बहनों ने मिलकर इस रिश्ते पर सगाई की मोहर लगा दी जबकि सोनम के परिवार के बारे में मिथुन के परिवार को कोई जानकारी नहीं थी। फिर भी परिवार अच्छा है, ये सोचकर शादी निश्चित कर दी गई। जाहिर है शादी भी आनन-फानन में ही हुई। शादी के कुछ ही दिनों बाद मिथुन ने सोनम के पास दवाइयों का एक बक्सा देखा तो पूछा कि वह किस चीज की दवाइयाँ ले रही हैं। सोनम ने बात को यह कहकर टाल दिया कि ये तो साधारण दवाइयाँ हैं और जैसे ही वह कुछ दिनों बाद मायके गई, दवाइयों का वह बॉक्स वहीं छोड़ आई। उसे वापस आए एक महीना भी नहीं बीता होगा कि उसकी तबीयत गड़बड़ाने लगी। डॉक्टर को दिखाया तो पता चलने पर मिथुन के परिजनों के तो पैरों तले से जमीन खिसक गई।छुपाएँ नहीं मेडिकल हिस्ट्री : | | विवाह के पहले यदि चिकित्सकीय दृष्टि से वर-वधू तथा उनके परिवार अपने बारे में एक-दूसरे को खुलकर बता दें तथा चिकित्सकीय परीक्षण के बाद इस बंधन में बँधने का इरादा करें तो शायद जिंदगी भर वे सुखी रह सकते हैं। |
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सोनम को ओवेरियन सेक्शन में टीबी का ट्यूमर था, जो इतना गहरा और फैला हुआ था कि बाद में डॉक्टर्स ने भी उसे निकालने से मना कर दिया। यह बात सोनम सहित उसके सारे परिवार वालों को मालूम थी, लेकिन मिथुन व उसके परिजनों से छुपाई गई। आज इस बात को चार साल बीत चुके हैं... सोनम का अब भी इलाज चल रहा है। हालाँकि एक सहृदय इंसान होने के कारण मिथुन ने उसके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया और बकायदा ससम्मान इस रिश्ते को निभा रहा है। लेकिन उसके भविष्य पर एक प्रश्नचिह्न जरूर लग चुका है।इसके बिलकुल उलट पिछले दो सालों से एक-दूसरे के परिचित शोमा तथा कुणाल ने जब विवाह बंधन में बँधने की तैयारी की तो उनकी लिस्ट में सबसे पहली प्राथमिकता दोनों का मेडिकल चेकअप था। उन दोनों ने तथा उनके परिवारों ने भी इस बात पर सहमति दी और समझदारी से निर्णय लेते हुए कुंडली मिलाने की बजाय मेडिकल रिपोर्ट्स के मिलने पर जोर दिया। साथ ही शोमा तथा कुणाल दोनों के ही परिजनों की भी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में सभी ने साथ बैठकर बात की। जहाँ शोमा के पिता ने यह बात कही कि उनके परिवार में डायबिटीज की तकलीफ आनुवांशिक है, वहीं कुणाल के परिवार ने भी इस बात को सहजता से स्वीकारा कि उनके परिवार में पिछली दो पीढ़ियाँ हृदय रोग से पीड़ित रही हैं। कुणाल और शोमा दोनों ने इन बातों को समझदारी से सुना और इस बारे में डॉक्टर की सलाह भी ली। डॉक्टर ने उन दोनों को पूरी तरह स्वस्थ होने का सर्टिफिकेट दिया और यह भी कहा कि उन दोनों के ही परिवार की आनुवांशिक बीमारियों से वे बचे रह सकते हैं यदि वे उचित खानपान, व्यायाम तथा स्वस्थ लाइफस्टाइल को अपनाएँ। अब हर चीज आईने की तरह साफ थी और कुणाल तथा शोमा दोनों खुशी-खुशी विवाह बंधन में बँध गए। | | आजकल यह चलन महानगरों के अलावा छोटे शहरों तथा कस्बों में भी तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ विवाह पूर्व चिकित्सकीय कुंडली मिलाना जरूरी समझा जाता है। यह एक अच्छी मिसाल है। यदि आपके परिवार में भी कोई विवाह तय होने जा रहा है तो इन बिंदुओं पर जरूर ध्यान दें। |
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ये दोनों ही उदाहरण हमारे आसपास के ही हैं। पहले में जहाँ नासमझी और थोड़ी-सी असावधानी जिंदगी भर के लिए दुःख बन गई वहाँ दूसरे उदाहरण में दांपत्य जीवन की नींव और मजबूत हो गई और न केवल दांपत्य जीवन की बल्कि दो परिवारों के बीच की नींव भी सुदृढ़ हो गई। मुद्दा यही कि विवाह के पहले यदि चिकित्सकीय दृष्टि से वर-वधू तथा उनके परिवार अपने बारे में एक-दूसरे को खुलकर बता दें तथा चिकित्सकीय परीक्षण के बाद इस बंधन में बँधने का इरादा करें तो शायद जिंदगी भर वे सुखी रह सकते हैं। जहाँ तक बात दुर्घटना या त्रासदी की है, वह किस्मत पर निर्भर करता है और उस दशा में तो बल्कि प्रेम, समर्पण तथा त्याग की भावना और भी उभरकर सामने आती है लेकिन जानबूझकर मक्खी निगलना गलत है। ऐसे में विवाह के पूर्व वर-वधू के साथ ही उनके परिवारों की चिकित्सकीय कुंडली का मिलना आवश्यक है। आजकल यह चलन महानगरों के अलावा छोटे शहरों तथा कस्बों में भी तेजी से बढ़ रहा है, जहाँ विवाह पूर्व चिकित्सकीय कुंडली मिलाना जरूरी समझा जाता है। यह एक अच्छी मिसाल है। यदि आपके परिवार में भी कोई विवाह तय होने जा रहा है तो इन बिंदुओं पर जरूर ध्यान दें।1. समझदारी के साथ दोनों ही परिवार अपनी मेडिकल हिस्ट्री या चिकित्सकीय इतिहास को एक-दूसरे से बाँटें ताकि आने वाले दिनों में कोई भी बात रिश्ता तोड़ने की वजह न बन पाए।2. लड़का-लड़की दोनों की पूरी चिकित्सकीय जाँच करवाएँ तथा डॉक्टर से उनकी फिटनेस का प्रमाण-पत्र लें, तभी आगे बात बढ़ाएँ। क्योंकि आपकी एक छोटी-सी गलती उन दोनों के लिए अनजाने में भी जीवन-मरण का प्रश्न बन सकती है।3. लड़का-लड़की स्वयं से जुड़ी परेशानियाँ भी छुपाएँ नहीं, स्पष्ट कर दें। ताकि संबंधों की सुदृढ़ता भी बनी रहे। 4. यदि कोई एक पक्ष इस तरह के कुंडली मिलान को अपनी हेठी या अपमान मानकर आक्रोश में आए तो उसे संयत लहजे में इस बात का महत्व समझाएँ। यदि वह अपने बच्चे का भला चाहता है तो उसे सहमत होते देर नहीं लगेगी। 5. और अंत में सबसे जरूरी बात, जहाँ भी आपको लगे कि मेडिकल जाँच का नाम आते ही सामने वाला पक्ष टालमटोल की स्थिति में आ जाता है, तुरंत सतर्क हो जाएँ।याद रखिए, रिश्ते विश्वास की नींव पर ही बनते और टिके रहते हैं। यदि पहले चरण में ही आपने विश्वास खो दिया तो जिंदगी भर का साथ कैसे निभाएँगे। इसलिए किसी की भी जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने से बचें। |
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