हम सभी की ख्वाहिश एक सुखी परिवार की रहती है लेकिन कभी-कभी हमारी यह महत्वाकांक्षा इतनी अधिक बढ़ जाती है कि इसके चलते हम परिवार को सुविधाएँ और खुशियाँ तो दे देते हैं परंतु उन खुशियों में अपनी अनुपस्थिति से मिलने वाला दु:ख भी मुफ्त में दे देते हैं। आजकल अधिकांश परिवारों में पति-पत्नी दोनों कामकाजी होते हैं। ऐसे में ऑफिस के काम के कारण कभी पत्नी घर से बाहर रहती है तो कभी पति। | | आप चाहे तो अपने परिवार की हर खुशी में शरीक हो सकते हैं परंतु इसके लिए आपको अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लाइफ में संतुलन बनाकर चलना होगा। यदि आप ऑफिस के काम व तनाव को घर लेकर गए तो निश्चित ही आपके परिवार में विवादों की शुरूआत हो जाएगी। |
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ऐसी स्थिति में बच्चों के हिस्से में अधूरी खुशियाँ आना तो स्वभाविक है। माँ-बाप की इसी अनदेखी व रिश्तों में भी प्रोफेश्नलिज्म के आ जाने के कारण उनके बीच में दूरियाँ बढ़ने लगती हैं। क्या आपको कभी इस बात का भी आभास होता है कि आप अपना जितना वक्त अपने ऑफिस, बॉस या अन्य कार्यों में गुजार देते हैं। उसका आधा वक्त भी आप अपने जीवनसाथी व परिवार को नहीं दे पाते हैं। आए दिन किसी न किसी प्रोजेक्ट या ऑफिशियल टूर के कारण आप अपनों से दूर होते जाते हैं। हालाँकि यह सच है कि आज हम अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के सपने को पूरा करने के लिए ही काम कर रहे हैं। आप चाहें तो अपने परिवार की हर खुशी में शरीक हो सकते हैं परंतु इसके लिए आपको अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल दोनों लाइफ में संतुलन बनाकर चलना होगा। यदि आप ऑफिस के काम व तनाव को घर लेकर गए तो निश्चित ही आपके परिवार में विवादों की शुरूआत हो जाएगी। |