किसी ने मुझसे पूछा कि मैडम इतना कुछ होने के बाद आप धैर्य कैसे रख लेती हैं जबकि आपने आधे से ज्यादा समय उस काम को करने में बिता दिया था। मैंने कहा- मुझे पता है कि मैंने बहुत समय इस समस्या का समाधान निकालने में बिताया है। मैं इस प्रोग्राम को फिर से लिखने की कोशिश करूँगी। मैं इसलिए चुप रही, क्योंकि एक बार मैंने भी ऐसी गलती की थी। विद्यार्थियों की प्रार्थना थी कि मैं उन्हें वह किस्सा सुनाऊँ । मैं उन्हें अपनी कहानी सुनाने लगी। | | प्यार, अपनेपन की भावना तथा गुणों की प्रशंसा से ही अच्छे संबंध बन सकते हैं। हम अपना ज्यादा से ज्यादा समय काम करने में व्यतीत करते हैं। यह समय खुशी से बिताना चाहिए, न कि एक-दूसरे पर इल्जाम लगाकर। |
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जब मैं युवती थी तब इस बात को लेकर बहुत ही संवेदनशील रहती थी कि लोग लड़कियों के बारे में क्या टिप्पणियाँ करते हैं। यदि वे कहते हैं कि लड़कियाँ काम नहीं कर पाती हैं तो मैं उस कार्य को करने की कोशिश करती थी, ताकि उन्हें अपनी गलती का अहसास हो सके। मैं विश्व को दिखाना चाहती थी कि लड़कियाँ सब कुछ कर सकती हैं। अब मैं इस तर्क पर हँसती हूँ। यदि पुरुष कुछ क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं, तो महिलाएँ दूसरे क्षेत्र में। पुरुष और महिलाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं। मैं एक कम्प्यूटर कंपनी में सिस्टम एनॉलिस्ट का काम कर रही थी। उस समय कम्प्यूटर हार्डवेयर इतना एडवांस नहीं था। आज एक प्लॉपी साढ़े तीन इंच की होती है। उस समय एक बड़ा भारी टैंडम डिस्क प्रयोग किया गया था, जिसका वजन 15 किलो था। एक बार कंपनी प्रबंधक ने कहा कि इस डिस्क को केवल पुरुष ही उठा सकते हैं। उनकी इस बात से मुझे बहुत दुःख हुआ और मैंने उनसे कहा कि मैं इसे उठाकर दिखाऊँगी। मैं बहुत ही गहराई से मानती थी कि यदि किसी व्यक्ति की भावनाएँ चेहरे से झलकती हैं तो यह उसकी कमजोरी है। आज मैं मानती हूँ कि भावनाओं को व्यक्त करना अच्छा होता है। डिस्क जब मैं लेकर आई तो मेरे बॉस ने मुझसे पूछा- तुम इसे कैसे उठाकर लाईं। बिना सोचे-समझे खुशी के मारे मैंने अपना हाथ उठा दिया, जिससे डिस्क जमीन पर गिरकर टूट गई। उसकी आवाज पूरे दफ्तर में सुनाई दी। ऑफिस में जितने भी कर्मचारी मौजूद थे, वे मुड़कर मुझे देखने लगे। कंपनी के इतिहास में ऐसी गलती किसी ने नहीं की थी। यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी जो कि माफ कर देने योग्य भी नहीं थी। कंपनी का पूरा डेटा एक क्षण में खत्म हो गया था। |
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