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गलती सबसे होती है
- सुधा मूर्ति

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एक बार मैंने कम्प्यूटर विज्ञान की क्लास में विद्यार्थियों को बहुत कठिन प्रश्न हल करने के लिए दिया। कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग तकनीकी होने के साथ-साथ एक कला भी है।

विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरते हुए विद्यार्थी समस्या के समाधान तक पहुँचते हैं। मैं कभी भी अपने विद्यार्थियों को एक ही तरीके से नतीजे पर पहुँचने के लिए नहीं कहती।

मैं विद्यार्थियों को हमेशा आजादी देती हूँ कि वे किसी भी प्रणाली के माध्यम से नतीजे पर पहुँच सकें। जो प्रश्न विद्यार्थियों को हल करने के लिए मैंने दिया था वह बहुत कठिन था तथा उसको हल करने के लिए खुद मुझे एक सप्ताह लगा था। जब मैंने समस्या का समाधान कर कक्षामें प्रवेश किया तो विद्यार्थी उसे देखना चाहते थे।

अपनी छात्रा नलिनी को मैंने सीडी दी और कहा कि वह नकल कर उस सीडी को वापस कर दे। साथ ही कहा- इसे ध्यान से रखना, क्योंकि मेरे पास इसकी एकमात्र प्रति है। नलिनी ने जब डिस्क को कम्प्यूटर ड्राइव में लगाया तब सभी प्रोग्राम देखने के लिए उसे घेरकर खड़े हो गए।

  मैं विश्व को दिखाना चाहती थी कि लड़कियाँ सब कुछ कर सकती हैं। अब मैं इस तर्क पर हँसती हूँ। यदि पुरुष कुछ क्षेत्र में अच्छा कर सकते हैं, तो महिलाएँ दूसरे क्षेत्र में। पुरुष और महिलाएँ एक-दूसरे के पूरक हैं।      
वह मुझसे बात कर रही थी कि अचानक गलती से उसने डिस्क को फार्मेट कर दिया। डिस्क से सभी सामग्री गायब हो गई थी। सभी विद्यार्थी दंग रह गए। वे मुझे देखने लगे।

नलिनी रोने लगी क्योंकि वह जानती थी कि मैं एक सप्ताह से उस समस्या का समाधान ढूँढने की कोशिश कर रही थी। कुछ देर के लिए मैं बहुत दुःखी थी। पाँच मिनट तक मैं चुप रही, फिर मैं मुस्कुराने लगी थी। एक मुस्कुराहट से चिंता दूर हो सकती है।

मुस्कुराहट चिंता को दूर करती है और दोस्ती के लिए एक बहुत अच्छी दवाई का काम करती है। मेरे विद्यार्थी ही मेरे सबसे करीबी दोस्त थे, हैं। मेरी मुस्कुराहट से सभी की चिंताएँ दूर हो गईं। मैं चुपचाप उठकर खड़ी रह गई। नलिनी अब भी रो रही थी।

क्षमा माँगते हुए उसने कहा- मैडम, मुझे माफ कर दीजिए। मैंने कहा कि नलिनी मुझे मालूम है कि तुमने जान-बूझकर यह गलती नहीं की है। गलती किसी से भी हो सकती है। यदि किसी ने कहा कि उसने कभी गलतियाँ नहीं कीं तो वह इंसान नहीं है, बल्कि कोई रोबोट है।

इंसान से ही नहीं, ऋषि-मुनियों से भी गलतियाँ हो सकती हैं। सबको मिलकर अब यह देखना है कि हम प्रोग्राम को फिर से ठीक कर सकते हैं या नहीं।
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