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कहानी सुनने वाले राम-गोपाल
  मैं ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं जानती थी जो गैरेज चलाते थे। वाहन चालक को उसका नाम-पता मालूम नहीं था। उसे देखे बिना मैं कैसे पहचान सकती थी? मैंने यही अनुमान लगाया कि शायद वह मेरा कोई पुराना विद्यार्थी होगा।      
मैंने कहा कि गाड़ी मरम्मत करवाने के लिए ले चलते हैं। जब वाहन चालक गाड़ी को ठीक करवाकर वापस घर आया तब उसने मुझसे कहा कि गाड़ी को देखने के बाद गाड़ी के कारीगर ने आपके बारे में पूछा। 'क्या आप गुडलक गैरेज के मालिक को जानती हैं?'

मैंने कहा कि नहीं, मैंने कभी ऐसा नाम नहीं सुना। क्या यह नए गैरेज का नाम है? वाहन चालक ने कहा- जी यह नया गैरेज है। मैं हमेशा उन गैरेज में जाना पसंद करता हूँ, जिसे युवा लड़के चलाते हों। वह पूछ रहा था कि 'क्या अब भी आप कॉलेज में पढ़ाती हैं?'

मैं ऐसे किसी व्यक्ति को नहीं जानती थी जो गैरेज चलाते थे। वाहन चालक को उसका नाम-पता मालूम नहीं था। उसे देखे बिना मैं कैसे पहचान सकती थी? मैंने यही अनुमान लगाया कि शायद वह मेरा कोई पुराना विद्यार्थी होगा।

मैं कम्प्यूटर विज्ञान पढ़ाती थी। मैं समझ नहीं पा रही थी कि कोई व्यक्ति कम्प्यूटर विज्ञान के क्षेत्र से ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में कैसे कदम रख सकता है? जब वाहन चालक ने कहा कि गैरेज के मालिक ने आपके बारे में पूछा, तब मैंने सोचा कि मुझे उस व्यक्ति से जाकर मिलना चाहिए, जो मेरे बारे में इतना जानता है।

दूसरे दिन जैसे ही मैंने गुडलक गैरेज में कदम रखा, मैंने देखा गैरेज आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित था। गैरेज में काँच से निर्मित ऑफिस था। मैंने ऑफिस में कदम रखा तब नीले रंग के कपड़े पहने एक सुंदर युवक ने मेरा स्वागत किया। उसके हाथ में पाना (औजार) एवं अन्य उपकरण थे।

उसने कहा कि मैडम आइए, इस ऑफिस में बैठ जाइए। मैं हाथ धोकर, आपसे मिलने आता हूँ। मैं सोफे पर बैठकर ऑफिस को देख रही थी कि इतने में वह हाथ में कॉफी तथा पानी का गिलास लेकर वहाँ पर पहुँचा।

(क्रमशः अगले अंक में )
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