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सबसे महान कौन?
जब मैंने कहानी खत्म की, विद्यार्थी मेरी बातों से प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने मुझसे पूछा कि इस कहानी में कौन-सी बात आपको महत्वपूर्ण लगी। एक हठी लड़की है। एक बेवकूफ अध्यापक, एक अव्यावहारिक चोर एवं गैरजिम्मेदार पिता है। हम इस कहानी से क्या सीख सकते हैं?

मैंने उनसे कहा कि किसी घटना का अर्थ तुम किस प्रकार निकालते हो, यह तुम्हारे विवेक पर निर्भर करता है। मैंने इस कहानी का अर्थ अलग प्रकार से निकाला है। साहसी रत्नप्रभा, दयालु अध्यापक, दयालु चोर एवं उत्तरदायी पिता, जो बेटी की भावनाओं का महत्व समझते हैं। अब बताओ, इस कहानी में कौन-सा व्यक्ति सबसे महान है?

कक्षा में बहुत आवाजें होने लगीं, छात्र आपस में इस कहानी को लेकर वाद-विवाद करने लगे। मैं मुस्कराकर उनको देख रही थी। एक समूह के छात्रों ने उठकर कहा कि मैडम हम समझते हैं कि रत्नप्रभा महान थी, क्योंकि वह हर कठिनाई के बारे में सजग थी।

उसके पिता ने उसे जाने से रोका था, वह चोर से डरती थी, जंगलों के जानवरों से डरती थी, फिर भी वह यह मानती थी कि गुरुदक्षिणा शिक्षक को देना चाहिए। हम यही आशा करते हैं मैडम कि आप हमसे ऐसी गुरुदक्षिणा नहीं चाहेंगी। उनकी बात सुनकर पूरी कक्षा हँसने लगी। मैं चुप रही।

दूसरा समूह उठ खड़ा हुआ और बहस करने लगा। वह इस बात से सहमत नहीं था। उसने कहा- रत्नप्रभा महान लड़की नहीं थी। चोर ही सबसे महान व्यक्ति है, क्योंकि आमतौर पर चोर का काम होता है लोगों को लूटना। उसके बाद लुटे हुए व्यक्ति का क्या होगा, वह इस बारे में नहीं सोचता। रत्नप्रभा का अध्यापक और पिता के साथ रिश्ता था। वे एक-दूसरे के प्रति कटिबद्ध थे। चोर का उससे कोई लेना-देना नहीं था। इसलिए चोर ही सबसे महान है।


इससे पहले कि वे अपनी बात पूरी कर पाते, एक और समूह उठ खड़ा हुआ और कहने लगा कि अध्यापक महान था, क्योंकि उन्होंने रत्नप्रभा से कहा कि उसे शुल्क देने की चिंता नहीं करना चाहिए। जब रत्नप्रभा जिद करने लगी, तब उन्होंने उसे कठिन स्थिति में डाल दिया। जब वह उनके द्वार तक पहुँच गई तो वे चकित और चिंतित हो उठे। उन्होंने दिल से रत्नप्रभा को आर्शीवाद दिया।

अंत में एक समूह था, जिसने इन सब बातों पर विश्वास नहीं किया। उनके अनुसार पिता सबसे महान थे। उन्होंने विवाद करते हुए कहा कि पिता ने रत्नप्रभा को अपने आप निर्णय लेना सिखाया। कितने पिता अपनी बेटी को ऐसा करने देते हैं? मैडम, आप बताइए कि इस कक्षा में कितनी लड़कियाँ हैं, जो आजादी से निर्णय ले सकती हैं? इसके बाद शोरगुल का स्तर बहुत ही बढ़ गया। मुझे लगा कि अब मुझे हस्तक्षेप करना होगा।

मैंने कहा- इस कहानी में कोई महान नहीं है। दरअसल, यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम चीजों का किस प्रकार आकलन करते हैं। जब भी कोई समस्या उठती है तो हमें उसे अलग-अलग दृष्टिकोण से देखना चाहिए। हो सकता है, हम सब अलग-अलग निर्णय पर पहुँचें।

जब भी हम किसी पर इल्जाम लगाएँ, तब केवल एक क्षण के लिए हमें उस व्यक्ति की मनःस्थिति की कल्पना करते हुए समझना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया होगा? तभी हमें कोई निर्णय लेना चाहिए। अब पूरी कक्षा इस बात से सहमत थी।
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