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'रेनी डे' के लिए!
हर मध्यमवर्गीय परिवार की तरह मैं अपने परिवार के साथ बहुत ही खुशी की जिंदगी बिता रही थी। बांद्रा में हमारा फ्लैट था। फोर्ट में स्थित टेल्को में मैं काम करती थी एवं मूर्ति नरीमन पॉइंट में काम करते थे। एक दिन पति ऑफिस से वापस घर लौटे तो वे बहुत चिंतित लग रहे थे। स्वभाव से वे बहुत मितभाषी हैं एवं अपनी भावनाओं को जल्दी प्रकट नहीं करते हैं। उस दिन उनका व्यवहार कुछ अलग-सा था। मैं खाना बना रही थी।

मैंने पूछा- आप चिंतित क्यों दिख रहे हैं?

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सॉफ्टवेयर देश के सबसे बड़े व्यापारों में से एक होगा। इस देश में चतुर व्यक्तियों की कोई कमी नहीं है। सॉफ्टवेयर लिखने के लिए तार्किक दिमाग एवं कठिन परिश्रम की जरूरत होती है, जो भारत में नहीं पाए जाते हैं। हमें इन गुणों को ढूँढना चाहिए। मैं एक सॉफ्टवेयर कंपनी खोलना चाहता हूँ।

मैं चकित रह गई। मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि कभी हम एक नई कंपनी खोलेंगे। मूर्ति एवं हमारे परिवार में से कोई भी उद्योगपति नहीं था। मैंने सोचा कि मूर्ति पीसीएम में काम करते रहेंगे एवं मैं टेल्को में काम करती रहूँगी। इस तरह सुखी जीवन व्यतीत करेंगे। तुरंत मैंने सोचा कि मैं न कह दूँ।

मूर्ति व्यापार के लिए बनाई गई योजना एवं कल्पनाओं का वर्णन करने लगे। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हें इतिहास से बहुत लगाव है। तुम मेरे विचारों से अवश्य सहमत होंगी। पूर्व में हम भारतीय औद्योगिक क्रांति के विषय पर कुछ कर नहीं पाए थे। अब भारत में बौद्धिक क्रांति आने वाली है। इस मौके का फायदा उठाना चाहिए। हमें इस क्रांति को भारत में लाना चाहिए। यदि इस समय को जाने देंगे, तब हम जिंदगी में बहुत बड़ा अवसर खो देंगे। मैं इस कदम को उठाना चाहता हूँ, मात्र पैसों के लिए नहीं बल्कि इस देश के लिए।

मेरा मन मेरे बचपन के दिनों में लौट गया। मेरे रिश्तेदार ने कुछ साल पहले निजी उद्योग शुरू किया था, परंतु वह सफल नहीं हुआ एवं अंत में उन्हें अपनी पारिवारिक संपत्ति को भी बेचना पड़ा। इस घटना के बाद निजी रूप से व्यापार प्रारंभ करना मुझे नुकसानदायक लगता था। मुझे डर था कि वैसा ही हमारे साथ भी न हो। हमारे पास कोई संपत्ति नहीं थी जिसके माध्यम से हम नुकसान की भरपाई कर सकें। इसके अलावा हमारी एक बेटी भी थी। मुझे चिंता होने लगी।
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