मुख्य पृष्ठ > विविध > वामा > वामा विशेष
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
'अम्मा, आपका कर्तव्य क्या है?'  Search similar articles
- सुधा मूर्ति
NDND
उस समय मेरी बेटी अक्षता ग्यारह-बारह साल की संवेदनशील लड़की थी। बंगलोर की रामन महर्षि अकादमी में वह दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाती थी। वह उनके लिए लिखती भी थी। जब वह घर लौटती तो उनकी अनोखी दुनिया के बारे में बताती थी।

बाद में उसने उनके बारे में एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था 'मैरी की आँखों से मैंने विश्व को देखा।' मैरी रामन महर्षि अकादमी की विद्यार्थी थी, जो विश्वविद्यालय की अंतिम परीक्षा में बैठने वाली थी। एक बार अक्षता मैरी को घुमाने लालबाग वाटिका ले गई। उन दोनों के बीच हुई बातचीत बहुत ही अलग थी। अक्षता ने मैरी से कहा कि इस वाटिका में विभिन्न प्रकार के लाल रंग के फूल खिले हुए हैं। मैरी ने विस्मित होकर पूछा, 'अक्षता, लाल रंग का अर्थ क्या है?'

अक्षता निःशब्द थी। वह समझ नहीं पाई कि किस प्रकार एक दृष्टिहीन व्यक्ति को लाल रंग का अर्थ बताएँ। अक्षता ने अपने हाथ में गुलाब, चमेली के फूल लिए और मैरी को देते हुए कहा कि इन फूलों को सूँघो। इन फूलों से विभिन्न प्रकार की महक मिलती है। मेरे हाथ में यह पहला फूल गुलाब का है, जिसका रंग लाल है। दूसरा फूल चमेली का है, जिसका रंग सफेद है। लाल और सफेद रंग क्या है, मुझे यह समझाना मुश्किल है, पर मैं इतना कह सकती हूँ कि विश्व में विभिन्न प्रकार के रंग हैं। उन रंगों की भिन्नता मात्र नेत्र के माध्यम से हम देख सकते हैं। रंगों को स्पर्श करने से उनकी विशेषता समझ नहीं सकते।
  उस समय मेरी बेटी अक्षता ग्यारह-बारह साल की संवेदनशील लड़की थी। बंगलोर की रामन महर्षि अकादमी में वह दृष्टिहीन बच्चों को पढ़ाती थी। वह उनके लिए लिखती भी थी। जब वह घर लौटती तो उनकी अनोखी दुनिया के बारे में बताती थी।      


इस घटना के बाद अक्षता ने मुझसे कहा, 'अम्मा, किसी दृष्टिहीन व्यक्ति से रंगों के बारे में कभी मत कहना। ऐसे में वे अपनी अक्षमता पर कुंठित महसूस करते हैं। मैं असहज महसूस कर रही थी जब मैं उसे रंगों का अर्थ समझा रही थी। अब मैं खुशबू एवं आवाजों के माध्यम से उन्हें रंगों के बारे में बताती हूँ। यह आसान माध्यम है जिससे कि वे समझ सकें।'

स्कूल में अक्षता अपने सहपाठी आनंद शर्मा, जो कि दृष्टिहीन था, की सहायता करती थी। आनंद बिहार के स्कूल शिक्षक का एकमात्र पुत्र था। वह बुद्धिमान एवं हँसमुख स्वभाव का था। वह विश्वविद्यालय परीक्षा के लिए तैयारियाँ कर रहा था। फरवरी का महीना था और चारों तरफ प्रकृति की सुंदरता फैली थी। मैं कॉलेज की बैठक के लिए तैयारियाँ कर रही थी। मैं पुराने पाठ्यक्रम के कागज, प्रश्न-पत्र एकत्रित कर रही थी।
1 | 2 | 3  >>  
और भी
टाटा : एक प्रेरक व्यक्तित्व
बड़े दिल वाला
एक शादी शहीदों के नाम
सलाम अब्दुल कलाम!!
दान और दानी दोनों सुपात्र हों
यह कैसा शिक्षक दिवस?