- सुधा मूर्ति
मेरे दफ्तर में दो छायाचित्र टँगे हुए हैं। प्रतिदिन दफ्तर में दिन की शुरुआत में उन्हें देखती हूँ। ये चित्र दो वृद्ध लोगों के हैं। एक चित्र में वृद्ध नीले रंग का सूट पहने हुए और दूसरे काले-सफेद चित्र में लंबी दाढ़ी वाले वृद्ध हैं।
बहुत लोगों ने मुझसे पूछा कि क्या उनसे मेरा कोई रिश्ता है। क्यों मैं अपना दिन इन चित्रों को देखकर प्रारंभ करती हूँ। जवाब में मैंने कहा- इन लोगों ने मेरे जीवन को बहुत प्रभावित किया है। मैं इनके प्रति बहुत कृतज्ञ हूँ। नीले रंग के सूट में भारत रत्न से सम्मानित जेआरडी टाटा हैं तथा दूसरे चित्र में श्री जमशेद टाटा हैं।
लेकिन ये चित्र दफ्तर में क्यों लगे हुए हैं?
इसे आप मेरा आभार प्रदर्शन कह सकते हैं। | | मेरे दफ्तर में दो छायाचित्र टँगे हुए हैं। प्रतिदिन दफ्तर में दिन की शुरुआत में उन्हें देखती हूँ। ये चित्र दो वृद्ध लोगों के हैं। एक चित्र में वृद्ध नीले रंग का सूट पहने हुए और दूसरे काले-सफेद चित्र में लंबी दाढ़ी वाले वृद्ध हैं। |
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जब मैं भारतीय विज्ञान संस्थान बंगलोर में कम्प्यूटर विज्ञान सीख रही थी तब अभियांत्रिकी विभाग में स्नातकोत्तर में मैं केवल एकमात्र लड़की थी तथा लड़कियों के होस्टल में रहती थी।
एक बार मैंने सूचना पट्ट पर एक विज्ञापन देखा। उसमें लिखा हुआ था कि एक प्रसिद्ध मोटरगाड़ी उद्योग में मेहनती, तेज, अभियांत्रिकी युवक की आवश्यकता है, परंतु उस विज्ञापन में यह भी लिखा हुआ था कि महिला उम्मीदवार को नौकरी के लिए आवेदन नहीं करना है। मैंने जब पढ़ा तो मुझे बहुत गुस्सा आया। इसे चुनौती मानकर मैंने नौकरी के लिए आवेदन किया। मैंने इसके साथ ही उद्योग के प्रबंधक को पत्र लिख दिया। उस समय उद्योग के अध्यक्ष सुमंत मुलगाँवकर थे, परंतु मैं इस बात से अनजान थी और मैंने जेआरडी टाटा को पत्र भेज दिया। दस दिन के अंदर मुझे तार मिला। उसमें मुझे साक्षात्कार के लिए टेल्को कंपनी में बुलाया गया था।
साक्षात्कार के लिए मैं टेल्को के पिंपरी ऑफिस में गई। चयनकर्ताओं के पैनल में 6 लोग थे। मैंने वहाँ की स्थिति देखकर अनुमान लगाया कि विषय कितना गंभीर है। मैंने किसी को फुसफुसाकर कहते सुना कि यही है वह लड़की जिसने जेआरडी टाटा को पत्र लिखा था।यह सब देख-सुनकर मुझे यकीन हो गया था कि नौकरी नहीं मिलने वाली है। साक्षात्कार के प्रारंभ में मैंने बेरुखी से कहा- मुझे आशा है कि यह मात्र एक तकनीकी साक्षात्कार है।
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