- सुधा मूर्ति
यह एक सच्ची कहानी है। अपने अमेरिका प्रवास के दौरान मैंने इसे रेडियो पर सुना था। यह दुनिया के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क की कहानी है। वे ठंड के दिन थे। एक शाम एक चिंतातुर माँ सड़क पर खड़ी थी। उसने एक पुराना-सा कोट पहन रखा था। उसके साथ एक छोटी-सी दुबली-पतली बिना बालों वाली लगभग गंजी लड़की थी। उसने अपने शरीर से बड़े कपड़े पहन रखे थे। शायद वो उसे किसी ने दान किए थे। उन लोगों के पास कोई घर नहीं था और वे बहुत गरीब थे।
बच्ची के हाथ में एक तख्ती थी जिस पर लिखा था मैं कैंसर पीड़ित हूँ कृपया मेरी मदद करें। महिला के हाथ में एक भीख का कटोरा था। जैसे ही ट्रैफिक की लालबत्ती होती वह लोगों के पास पहुँच जाती, उन्हें रोकती और मदद के लिए कहती।
अमेरिका एक बहुत बड़ा देश है। बहुत धनी भी। लेकिन यदि आप बीमार हैं और आपका बीमा नहीं है, तब आप कुछ भी नहीं हैं। कोई आपकी मदद नहीं कर सकता। लोग बहुत थोड़े पैसे दान में दे भी देते हैं जब वे देखते हैं कि मदद की सचमुच जरूरत है। | | यह एक सच्ची कहानी है। अपने अमेरिका प्रवास के दौरान मैंने इसे रेडियो पर सुना था। यह दुनिया के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क की कहानी है। वे ठंड के दिन थे। एक शाम एक चिंतातुर माँ सड़क पर खड़ी थी। उसने एक पुराना-सा कोट पहन रखा था। |
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इस प्रकार के दृश्य भारत में नए नहीं हैं। यहाँ हम बहुत सारे भिखारियों को हाथ में कटोरा लिए देखते हैं, लेकिन अमेरिका में ऐसे दृश्य आम नहीं हैं। लोग उस दुर्भाग्यशाली महिला और बच्ची को देखकर बड़ा अजीब-सा अनुभव कर रहे थे। एक दिन एक पुलिस वाला पास से गुजरा। उसने कुछ सवाल किए। देखा कि बच्ची बहुत बीमार लग रही थी। उसकी सूजी हुई आँखें और गंजे सिर को देखकर उसने उनकी मदद करना चाहा और अपना बटुआ खोला।
उसे अपने शानदार काम के लिए अच्छा बोनस मिला था और वही नोटों की गड्डियों के रूप में बटुए में से झाँक रहा था। उसने सोचा मेरे पास एक बढ़िया मकान है, देखभाल करने वाली पत्नी और प्यारा बेटा है।
भगवान ने मुझ पर दया की, परंतु इन अभागे लोगों के पास कुछ भी नहीं है। अगर भगवान उन पर दयालु नहीं है तो वह उन लोगों की कोई गलती नहीं है। उसे याद आया उसने अपनी पत्नी और बच्चों को इस बोनस को लेकर कई वादे किए थे। एक क्षण के लिए उसका मन डाँवाडोल हुआ और फिर उसने कुछ सोचकर अपना सारा नकदी उस महिला को दे दिया और कहा कि इस बच्ची की अच्छे से देखभाल करना।
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