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एक शादी शहीदों के नाम  Search similar articles
- सुधा मूर्ति

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विवाह जीवन का एक अनिवार्य संस्कार है। भारत में विवाह कई रीति-रिवाजों के साथ होता है। हमारी हिन्दी फिल्मों में कई कहानियाँ विवाह के विषय पर आधारित हैं। भारत का इतिहास गवाह है कि कई युद्ध विवाहों के कारण लड़े गए।

पहले विवाह संपन्न होने में पूरा एक सप्ताह तक लग जाता था। समय के साथ-साथ इसकी अवधि कम होती गई। पहले तीन दिन और वर्तमान में एक दिन के लिए यह शुभ समारोह होता है। विवाह में जिंदगी की सारी कमाई खर्च हो जाती है। शादी के लिए कई लोग पैसे उधार लेते हैं और सारी जिंदगी इस कर्ज को चुकाते रहते हैं। जब मैंने बँधुआ मजदूरों के साथ बातें की, तब अनुभव किया कि कर्ज चुकाने के कारण उनकी यह अवस्था हुई है। विवाह के समय हम बारातियों के सुख-सुविधा, दुल्हन के श्रृंगार, व्यंजन आदि के विषय पर चिंतित होते हैं।

हाल ही में मैं मास्को (रूस) गई थी। रूस का इतिहास बताता है कि रूस ने कई युद्ध जीते हैं । वहाँ के निवासी इन बातों से गर्वित हो उठते हैं। शहीद वीरों की स्मृतियों में कई स्मारक एवं मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। पहला युद्ध पीटर दी ग्रेट तथा स्वीडन के बीच हुआ था। दूसरा युद्ध फ्रांस के नेपोलियन एवं जार एलेक्जेंडर प्रथम के बीच हुआ था।

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मास्को में एक विशाल पार्क स्थित है, जिसका नाम है पीस पार्क। इस पार्क के मध्य में एक स्तंभ है और इस स्तंभ पर रूस में युद्ध की तारीख एवं स्थानों के बारे में लिखा गया था । पार्क में विभिन्न प्रकार के फव्वारे एवं रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। पर्यटकों के लिए यह एक आकर्षक स्थल है। रविवार के दिन मैं पार्क में गई थी। उस दिन हल्की-सी वर्षा एवं ठंड पड़ रही थी। मैं उस सुहावने मौसम का आनंद छतरी के तले ले रही थी। चारों ओर खिलती हरियाली मन को भा रही थी।

अचानक मेरी नजर कम उम्र के एक युगल पर पड़ी। उन्हें देखकर ऐसा लगा कि उनकी शादी हाल ही में हुई है। युवती बीस-बाईस वर्ष की थी, पतली-दुबली एवं नीली आँखों वाली। वह देखने में बहुत ही सुंदर थी। युवक भी उसी की उम्र का था तथा दिखने में आकर्षक था। वह फौजी कपड़े पहने था। युवती के सुंदर चमकते कपड़ों पर मोती जड़े हुए थे। युवती ने एक लंबी पोशाक पहन रखी थी। हाथ में एक गुलदस्ता था तथा युवक छतरी से उसे वर्षा की बूँदों से बचा रहा था ताकि वह भीग न जाए।

मैंने देखा कि वे स्मारक की ओर बढ़ रहे हैं। पहुँचने पर उन्होंने गुलदस्ता रखा एवं झुककर प्रार्थना की। कुछ देर बाद वे वहाँ से चले गए। मैं सोच रही थी कि उनसे प्रश्न करूँ कि वे क्या कर रहे थे? इस रिवाज का क्या अर्थ है, परंतु भाषाओं में अंतर होने के कारण मैं उनसे कुछ पूछ नहीं पा रही थी। उस समय एक वृद्ध व्यक्ति मेरे पास खड़े हुए थे। उन्होंने मुझे साड़ी पहने देखकर कहा कि क्या आप भारतीय हैं?
मैंने कहा- हाँ।

वृद्ध व्यक्ति ने कहा- मैंने राज कपूर की फिल्में देखी हैं। उनकी फिल्में बहुत ही अच्छी हैं। रूस में राज कपूर आए थे। क्या आप यह गाना जानती हैं- मैं आवारा हूँ...।

' क्या आप जानती हैं कि मास्को में भारत के तीन प्रसिद्ध व्यक्तियों की मूर्तियाँ स्थापित हैं?'
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