-सुधा मूर्ति माया एक सीधी-सादी युवती थी। वो दक्षिणी कर्नाटक में हुबली के निकट, मुंडुगाड के बाहरी इलाके की तिब्बती बस्ती में रहती थी। वो शिविर के बच्चों को तिब्बती भाषा पढ़ाया करती थी ताकि वे अपनी जड़ों से दूर ना हो जाएँ। वह एक चतुर और मेहनती युवती थी। मेरे पिता हुबली में डॉक्टर थे और वे अक्सर उस बस्ती में जाया करते थे। यदि किसी तिब्बती को अधिक इलाज की जरूरत होती तो वे हुबली के सरकारी अस्पताल में जाकर मेरे पिता से मिल लेते थे।
माया ने भी मेरे पिता के पास आना तब शुरू किया जब वो पहली बार माँ बनने वाली थी। समय के साथ वो हम सभी से घुल-मिल गई। जब कभी वो अस्पताल आती हमारे घर जरूर आती थी। मेरी माँ उसे खाने पर बुलाती और हम सब मिलकर खूब गपशप करते। हम सभी उसकी धाक महसूस करते और उसकी गोरी त्वचा, कबूतर जैसी आँखों, चपटी नाक और दो लंबी गुँथी हुई चोटियों को घूरते रहते।
धीरे-धीरे हमने उसे अपनी दोस्त स्वीकार कर लिया। वह मेरी बुनाई की शिक्षक बन गई। जब भी वो शिविर में आती हम बुनाई के साथ-साथ उसके जीवन और उसके अपने देश के बारे में ढेर सारी बातें करते। उसे अब भी अपने देश की बहुत यादआती थी।
माया अपने देश के बारे में बहुत भावुकता से बातें करती। | | अंदर घूमने के बाद मैं बाहर सीढ़ियों पर बैठी हुई उस सौंदर्य को निहार रही थी। उसी समय मैंने एक वृद्घ महिला को एक युवक के साथ विहार में आते हुए देखा। उस उम्रदराज महिला का चेहरापूरी तरह झुर्रियों से भरा हुआ था। उसने तिब्बत की पारंपरिक पोषाख पहन रखी थी |
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अतीत को याद करके उसकी आँखें भर आतीं। तिब्बत के लोग बहुत सरल होते हैं। हम सभी बौद्घ हैं लेकिन हम वश्रयान हैं। हमारी संस्कृति भारत से और विशेषकर बंगाल से बहुत प्रभावित है। हमारे धार्मिक क्रियाकलाप और यहाँ तक कि हमारी लिपि भी बांग्ला से मिलती-जुलती है। उसकी ये बातें मुझे तिब्बत नामक उस अनजान मनमोहक देश के प्रति जिज्ञासा से भर देतीं। मैं उसे परेशान कर देती कि वह मुझे अपने देश के बारे में और अधिक बातें बताए।
एक दिन हमने दलाईलामा के बारे में बातें शुरू कर दीं। 'दलाईलामा का क्या अर्थ है?' मैंने पूछा। उसने कहा- इसका मतलब है 'ज्ञान का सागर।' हमारा देश अनू्ठा है, जहाँ पिछले पाँच सौ सालों से एक धर्म प्रमुख का राज है। हम लोग पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं और मानते हैं कि हर दलाईलामा पिछले का अवतार होते हैं। हमारे वर्तमान दलाईलामा चौदहवें हैं और इसलिए हमने हमेशा उसका सम्मान किया है।
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