तमाशा देखने वाली पड़ोसन कुछ ऐसी पड़ोसनें भी होती हैं जो एक की चार लगाती हैं और फिर तमाशा देखती हैं। सास के विरुद्ध बहू के तथा बहू विरुद्ध सास के कान भरती हैं। ऐसी पड़ोसनें पहले तो घनिष्ठता बढ़ाती हैं, फिर आपका विश्वास जीतती हैं और फिर अपनी वाली पर उतर आती हैं।
माँगीलाल पड़ोसन पड़ोसनों में कई ऐसी भी मिल जाएँगी जो माँगने की आदत से मजबूर हैं। वे नमक-मिर्च, दूध-दही, शक्कर, आटा, बेसन आदि से लेकर ज्वेलरी तक माँगने में संकोच नहीं करतीं तथा फिर लौटाने का नाम नहीं लेतीं।
विघ्नसंतोषी प्रवृत्ति कुछ पड़ोसनें विघ्नसंतोषी होती हैं। लोगों का काम बिगाड़ने में उन्हें बड़ा मजा आता है। यदि पड़ोस में कोई बीमार है या किसी की परीक्षा चल रही है तो वे जानबूझकर अपना टीवी, टेप आदि तेज आवाज में बजाएँगी। यहाँ तक कि अपने घर का कचरा पड़ोसी के घर की तरफ डाल देती हैं ताकि वहाँ गदंगी हो जाए। ऐसी पड़ोसन केवल अपनी सुविधा का ध्यान रखती हैं।
झाँकू पड़ोसन कुछ पड़ोसनें दूसरों की जिंदगी में झाँकने की आदत से ग्रस्त होती हैं। पड़ोसी की बेटी कब, कहाँ जाती है, किसके साथ उसका चक्कर चल रहा है, कौन उसे छोड़ने आता है, किस सास-बहू, देरानी-जिठानी, ननद-भौजाई या भाई-भाई, पिता-पुत्र अथवा पति-पत्नी की बन नहीं रही, किसके यहाँ कौन मेहमान आया, क्यों आया, कब गया आदि सारी खबरें इनके पास होती हैं और फिर ये चटखारे लेकर उन्हें सुनाती या बताती हैं।
सहयोगी प्रवृत्ति निःसंदेह कुछ पड़ोसनें सहयोगी प्रवृत्ति की होती हैं तथा सुख-दुःख में बिना आमंत्रण के शामिल होती हैं। वे सच्ची हितैषी या शुभचिंतक होती हैं और विश्वसनीय भी। उनके मन में किसी प्रकार का छल-कपट नहीं होता, उनका मन निर्मल होता है। वे अपनी तरफ से कोई ऐसा कार्य, व्यवहार या आचरण नहीं करतीं, जिसकी वजह से आपको परेशानी हो। ऐसी पड़ोसन बड़े सौभाग्य से मिलती हैं।
हो सकता है आप इनमें से एक हों या इनमें से कुछ आपसे मिली हों। तो ऐसे में दुआ करें कि आप भी आखिरी वाली पड़ोसन की तरह बनें और आपको ऐसी ही पड़ोसन मिले जो सुख-दुख में आपका साथ दें सकें।
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