अपनी विरासत की कीमत समझना इसलिए जरूरी है, क्योंकि यह विरासत आपको भावनात्मक मूल्यों की कद्र करना सिखाती है। अपनी विरासत की कीमत समझना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि इससे आप अपने परिवार, अपनी पृष्ठभूमि और अपने पुरखों से जुड़ते हैं। इसलिए आपके पास अगर अपने दादा-दादी, अपने नाना-नानी की दी हुई छोटी से छोटी चीजें भी हों तो उन्हें सहेजना सीखिए। ये चीजें आपको अतीत का सफर कराती हैं। आपको अपने बचपन में खो जाने का नशा देती हैं।
मेरे एक मित्र जब एमआईटी (मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) में पढ़ने गए तब अपने साथ एक पीतल का चम्मच ले गए। दोस्तों ने उनका खूब मजाक उड़ाया, लेकिन वे कतई परेशान नहीं हुए। उसे उस चम्मच से बेहद लगाव था। उनकी नानी बचपन में उन्हें इसी चम्मच से खानाखिलाया करती थीं इसलिए उन्हें इस चम्मच से दिली लगाव था। आज भी उनके पास वह चम्मच मौजूद है और अपने जन्मदिन वाले दिन वे इस चम्मच से खीर जरूर खाते हैं।
हम सबको अपने बड़े-बूढ़ों की विरासतों को सहेजकर रखना चाहिए और उन्हें अपने बच्चों को सौंपना चाहिए, ताकि वे भी उन्हें अपने बच्चों को सौंप सकें और इस तरह जितने दिन भी हो सके परिवार की यह विरासत परिवार के लोगों को प्यार और भावनाओं की डोर से बाँधे रखे। पुरानी यादों को ताजा करने में सबसे बड़ी भूमिका होती है पुरानी तस्वीरों की।
तस्वीरों में बहुत आसानी से खरोंचें आ जाती हैं। इसलिए उन्हें ऐसी चीज में, ऐसी जगह में नहीं रखना चाहिए जहाँ से उनमें खरोंच आ जाए। तस्वीरों को लकड़ी के कपबोर्ड में भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे इनमें धूल के भरने और प्रिंट के खराब होने का डर रहता है।
जब भी ऐसी यादगार तस्वीरों को संभालकर रखें, उन पर लोहे का पिन कभी न लगाएँ, उन्हें स्टैपल न करें। तस्वीरों को हमेशा प्लास्टिक के कवर में रखें और उन्हें जितना कम छू सकें उतना कम छुएँ। पुराने पत्रों को सहेजने के लिए भी सावधानी बरतनी जरूरी है। इनमें भी पेपर क्लिप या ग्लू का इस्तेमाल न करें। इन्हें रबर बैंड में न बाँधें।
पत्रों को ऐसी ठंडी और सूखी जगह पर रखें जो उन्हें भुरभुरा न बनाए और अकड़ाए नहीं। याद रखें पानी, गर्मी, प्रकाश, धूल और घोल (पेस्ट) ये तमाज चीजें चिट्ठियों की दुश्मन हैं। इनसे इन्हें बचाएँ।
इन छोटी-छोटी सजगताओं से हम अपने जीवन की बड़ी-बड़ी खुशियों और बड़ी-बड़ी यादों को न सिर्फ सहेजकर रख सकते हैं बल्कि उन्हें एक बड़ी जिंदगी भी बख्शने में कामयाब रहते हैं।
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