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भावनाओं के एंटीक वो प्यारे उपहार
- दिव्यज्योति नंदन

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वो छोटा-सा लकड़ी का बक्सा, जिसे दादी सिरहाने रख सोया करती थीं और आपके तीसरे जन्मदिन पर उसी बक्से में चॉकलेट रख, वे आपको सौंप गईं। या फिर पहली बोर्ड एक्जाम में आपकी कलाई पर सजी वो घड़ी जो आपकी मम्मी को उनके पापा ने दी थी। ये सारी चीजें हो सकता है रुपयों के तौर पर कीमती न हों, लेकिन भावनाओं के तौर पर ये अमूल्य हैं। इसलिए ऐसी चीजों को सहेजे रखिए

जब हम किसी महान हस्ती की यादों के सँजोए संग्रहालय को देखने जाते हैं, तो वहाँ आखिर क्या देखते हैं? उनके द्वारा इस्तेमाल की गई चीजें, उनके द्वारा लोगों को लिखे गए पत्र, फोटोग्राफ्स और ऐसी चीजें जो सबके नहीं तो ज्यादातर लोगों के घर में अपने परिवार की विरासत के रूप में मौजूद होती हैं।

लेकिन आमतौर पर देखा जाता है कि बड़े चाव से संग्रहालयों को देखने जाने वाले लोग भी अपने घरों के इस कीमती खजाने की कद्र नहीं करते या करना नहीं जानते। हम किताबों में पिता के पत्र पुत्री के नाम (जवाहरलाल नेहरू के पत्र इंदिरा प्रियदर्शिनी के नाम) को चावसे पढ़ते हैं। बातचीत में और परवरिश संबंधित संदर्भों में अब्राहम लिंकन द्वारा अपने बेटे के अध्यापक को लिखे गए पत्र का उद्धरण देते हैं। लेकिन अपने पिताजी, दादाजी और नानाजी के हाथ के लिखे गए पत्रों को संभालकर नहीं रखते। यह भावनाओं का असम्मान है।
  वो छोटा-सा लकड़ी का बक्सा, जिसे दादी सिरहाने रख सोया करती थीं और आपके तीसरे जन्मदिन पर उसी बक्से में चॉकलेट रख, वे आपको सौंप गईं। या फिर पहली बोर्ड एक्जाम में आपकी कलाई पर सजी वो घड़ी जो आपकी मम्मी को उनके पापा ने दी थी।      


अगर आप एंटीक के प्रति प्यार रखते हैं, तो यह आपके घर में, आपके परिवार में, आपके चारों तरफ इर्दगिर्द बिखरा पड़ा होता है। बस, आपको संभालना आना चाहिए। अपने बचपन की तस्वीर जिनमें आपको कोई दूसरा तो क्या, आप अपने आपको नहीं पहचान पाते, आपके दादाजी के वे पत्र जिसमें उन्होंने पहली बार आपके शहर जाने पर शहर में किस तरह रहना है, इसके सुझाव और हिदायतें दी होती हैं

आपकी नानी के वो तोहफे जिन्हें याद करके अब हँसी आती है और जिनकी कीमत रुपयों के तौर पर अब शायद कुछ भी नहीं है। दरअसल, ये तमाम चीजें महज पुरानी होने के नाते महत्वपूर्ण नहीं हैं। ये चीजें आपके लिए इसलिए महत्वपूर्ण होनी चाहिए, क्योंकि इन चीजों में आपकी उम्र के अलग-अलग पड़ावों का इतिहास कैद है

इनमें वे भावनाएँ, वह प्यार, वह दुलार समाहित है जिसका वर्णन कोई भी कलम नहीं कर सकती। दो शब्दों में यह आपकी विरासत है। इसलिए यह किसी कीमती खजाने से कम नहीं है। इसे संभालना सीखिए।
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