1 सबसे पहले बच्चे को नाक-कान-गले के विशेषज्ञ के पास ले जाएँ और शारीरिक कारणों का पता लगाएँ। 2 आई.क्यू. लेवल का कम या अत्यधिक कम होना : आई.क्यू. टेस्ट द्वारा पता करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के पास ले जाएँ। 3 अगर शारीरिक त्रुटियाँ हों तो उन्हें दूर करने का प्रयास करें। 4 घर और स्कूल में ऐसे बच्चों को बोलने के लिए प्रेरित करें। 5 बच्चे का मजाक न उड़ाएँ बल्कि प्रेम से पेश आएँ। 6 अगर बच्चे की याददाश्त कमजोर हो तो उसे विकसित करने के लिए क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट से संपर्क करें। 7 स्पीच थैरेपिस्ट, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की सलाह से बच्चे के स्पीच का विकास करने का प्रयास करें। |