माँ का दूध शिशु के लिए अमृत के समान होता है। यह दूध जहाँ एक ओर शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास करता है, वही दूसरी ओर यह महिलाओं को अनचाहे गर्भ से मुक्ति दिलाता है। स्तनपान माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। जब कराएँ स्तनपान : प्राय: अनभिज्ञता के चलते प्रसव काल के तुरंत बाद माँ का दूध नहीं पिलाया जाता है, जो कि गलत है। डॉक्टरों के अनुसार माँ के पहली बार के दूध में अधिक से अधिक रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है।माँ के दूध से यदि बच्चे का पेट भर जाता हो, तो उसे बाहर का आहार न दें। सामान्य तौर पर माँ की कोई बीमारी शिशु को स्तनपान से नहीं रोकती है। कुछ महिलाएँ हल्की-फुल्की सर्दी, खाँसी, बुखार या जुकाम होने पर स्तनपान कराना बंध कर देती है, जो कि गलत है। यदि माँ के स्तन में किसी प्रकार का संक्रमण है तो पहले अपना इलाज करवाएँ फिर शिशु को स्तनपान कराएँ। जो महिलाएँ शिशु को स्तनपान नहीं कराती है। उनमें स्तन कैंसर होने की प्रबल संभावनाएँ होती है। |