हर माँ-बाप की ख्वाहिश होती है कि उनके बच्चे सबसे ज्यादा आज्ञाकारी, संस्कारी व होशियार हों। वो हर एक्टिविटी में अव्वल रहें लेकिन बच्चों से इतनी सारी अपेक्षाएँ करने वाले पालक शायद यह भूल जाते हैं कि वे स्वयं क्या हैं। बच्चों को बदलने के लिए उन्हें स्वयं भी अपने आप को बदलकर बच्चों के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करना होगा ताकि बच्चे उनका अनुसरण कर सकें और सबके सामने शान से कह सकें कि मेरे मम्मी-पापा वर्ल्ड के बेस्ट मम्मी-पापा है।कभी कुछ बच्चों को अपनी मम्मी अच्छी लगती है तो वहीं कुछ की पसंद अपने पापा होते हैं। बहुत कम बच्चों को मम्मी-पापा दोनों ही अच्छे लगते हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन यदि आपको अपने बच्चों को बेहतर परवरिश व अच्छा माहौल देना है तो आपको बदलना होगा तथा कुछ बातों में समझौता करना होगा।रहें सदा चुस्त-दुरूस्त : | | बच्चों को बदलने के लिए उन्हें स्वयं भी अपने आप को बदलकर बच्चों के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करना होगा ताकि बच्चे उनका अनुसरण कर सकें और सबके सामने शान से कह सकें कि मेरे मम्मी-पापा वर्ल्ड के बेस्ट मम्मी-पापा हैं। |
| |
अधिकांश माता-पिता शादी के बाद घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियों में इस कदर रम जाते हैं कि उन्हें खुद का खयाल ही नहीं रहता। ऐसे में कई बार बच्चों को अपने माता-पिता के जमाने के साथ अपरिवर्तनीय रवैये से परेशानी व शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। तभी तो स्कूल का कोई समारोह हो या दोस्तों की कोई पार्टी, बच्चों को अपने माता-पिता के व्यवहार व ड्रेसिंग सेंस के कारण शर्मिंदा होना पड़ता है। ऐसी स्थिति व शर्मिंदगी से बचने के लिए आपको बच्चों का दोस्त बनना होगा। उनके साथ व उनके अनुसार उनकी जिंदगी में ढलना होगा तथा ऐसा बनना होगा कि आपके साथ होने पर या आपसे अपने दोस्तों का परिचय कराते वक्त बच्चे शान से कह सकें कि मेरे मम्मी-पापा हैं। उन्हें आपसे किसी को मिलवाने में शर्मिंदगी नहीं अपितु गर्व महसूस हो।पुरानी बातें ना दोहराएँ : हर समय परिस्थितियाँ एक सी नहीं होती हैं। आपका बचपन का जमाना अलग था और आपके बच्चों के बचपन का दौर अलग। इसका यह अर्थ नहीं कि आपके पालकों ने जो कुछ आपके साथ किया वो आप बार-बार दुहराकर अपने बच्चों पर भी वैसा ही करने के लिए दबाव डालें।यदि आप अपने अतीत की बातों को लेकर बार-बार अपने बच्चों को ताने देते रहेंगे तो हो सकता है धीरे-धीरे बच्चा आपकी बातों पर ध्यान देना ही बंद कर दे। बच्चों को समझाने के लिए सबसे पहले आपको बीती बातों को भुलाकर वर्तमान में जीना होगा, तभी आप बच्चों के चहेते बन पाएँगे। घर में प्यार का माहौल बनाएँ : आपके घर-परिवार के माहौल और जीवनशैली से बच्चा बहुत कुछ सीखता है। आप जैसा अपने परिवार के सदस्यों से व्यवहार करते हैं वैसा ही व्यवहार बच्चा सीखता है। यदि आप बच्चों के सामने अपने बड़ों व हमउम्र से आदर से बातचीत करते हैं तथा उनका यथोचित आदर-सत्कार करते हैं तो आपके वो गुण आपके बच्चे में भी आएँगे। अच्छे मम्मी-पापा बनने के लिए व बच्चों को बेहतर परवरिश देने के लिए आपको अपने जीवनसाथी से होने वाले रोज-रोज की कलह रूपी अग्नि को प्यार के जल से बुझाना होगा और अपने बच्चों के अच्छे मम्मी-पापा बनकर दिखाना होगा। |