' अरे, पड़ोसी के रोहन को तो देखो। हर काम में कितना आगे है और हमारे बच्चे को तो कुछ आता ही नहीं।' इस तरह की कई भली-बुरी बातें हम अपने बच्चों के बारे में करते हैं। हर बच्चे की ग्राह्यक्षमता अलग-अलग होती है। कोई बच्चा किसी बात को जल्दी से समझ लेता है और किसी को समझाने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में बच्चे को बार-बार डाँटना व ताने देना उसमें हीन भावना भर देता है। जिससे वह अपने आपको निकृष्ट समझने लगता है और गलत कदम उठा लेता है। * तुलना न करें :- बार-बार अपने बच्चे को 'नाकारा' कहकर दूसरे बच्चे को उससे श्रेष्ठ बताना बच्चे के मन में आपके प्रति अविश्वास व हीन भावना पैदा कर सकता है। जिससे बच्चा आपसे खुलकर बात करने में झिझक महसूस करेगा। कई बार माता-पिता अपने ही बच्चों में तुलना करने लगते हैं। हर बच्चा हर काम में परिपूर्ण हो, यह संभव नहीं है। हर बच्चे में कुछ न कुछ खामी हो सकती है। वह खामी तभी दूर होगी। जब हम बच्चे की तुलना न करके आप उसकी हौसला अफजाई करेंगे। | | कई बार माता-पिता अपने ही बच्चों में तुलना करने लगते हैं। हर बच्चा हर काम में परिपूर्ण हो, यह संभव नहीं है। हर बच्चे में कुछ न कुछ खामी हो सकती है। वह खामी तभी दूर होगी। जब हम बच्चे की तुलना न करके आप उसकी हौसला अफजाई करेंगे। |
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* प्रोत्साहित करें :- बच्चे को बात-बात पर उलाहना देने की बजाय उसे प्रोत्साहित करें। उसे विश्वास दिलाए कि वह किसी से कम नहीं है। चाहे तो वह भी दूसरे बच्चों जैसा कार्य कर सकता है। बच्चे भी चाहते हैं कि उनके अच्छे कार्यों की सराहना की जाएँ। आपका प्रोत्साहन बच्चे के मन में आपके प्रति विश्वास पैदा करेगा। जिससे बच्चा उस विश्वास पर खरा उतरने के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करेगा। |