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बच्चों की मालिश
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जब घर में नन्हे-मुन्ने की किलकारियाँ गुँजती हैं तो मन में प्रसन्नता का अहसास होता है। लेकिन जब वह लगातार रोता है तो कई बार माँ भी नहीं समझ पाती कि उसे क्या तकलीफ है।

नन्हें शिशु को संभालना कोई आसान बात नहीं है। खासकर तब जब वह एक या दो हफ्ते का हो। नन्हे शिशु की देखरेख करने में घर की बड़ी महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

बच्चा जब लगातार रोता है तो घर की बड़ी-बूढ़ी महिलाएँ झट से भाँप जाती हैं कि उसके पेट में तकलीफ है या उसकी पसलियों में दर्द है।

मालिश से बच्चे के शरीर की थकी हुई माँसपेशियों को आराम मिलता है। मालिश बच्चों को कई तकलीफों जैसे पसलियों का दर्द, थकान आदि से फायदा पहुँचाती है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और बच्चे के शरीर का विकास तेजी से होता है।
घर में अगर नानी-दादी हों तो वे बच्चों की हर रोज मालिश करने की सलाह देती हैं। इससे बच्चे का शरीर मजबूत बनता है लेकिन आजकल की महिलाएँ तो बच्चों के थोड़ा सा भी रोने पर घबरा जाती हैं व तरह-तरह की चिंताएँ करने लगती हैं।

कई महिलाएँ इस डर के मारे बच्चों की मालिश नहीं करती हैं कि उससे उनके बच्चे को कहीं कोई नुकसान न हो जाए।

मालिश से बच्चे को कोई नुकसान नहीं होता पर इसके लिए आवश्यक है कि मालिश सही तरीके से की जाए।

मालिश के साथ बच्चे की गेहूँ के आटे व तेल की लोई भी की जाती है। इससे उनके शरीर के अनचाहें बाल भी निकल जाते है तथा रक्तसंचार भी बढ़ता है।

* शुरुआत कब से करें? :-
सामान्यत: बच्चे के जन्म के पहले हफ्ते के बाद से ही मालिश आरंभ कर देनी चाहिए तथा 18 माह तक जारी रखनी चाहिए। सुबह एक बार बच्चे को नहलाने से पहले तथा शाम को उसके सोने से पहले मालिश करनी चाहिए।

मालिश का कोई विशेष मौसम नहीं होता है। यह हर मौसम में की जा सकती है। गर्मियों में दिन में दो बार तथा सर्दियों में तीन बार मालिश करना उचित रहता है।

* मालिश का सही तरीका :-
माँ अपने दोनों पैर फैलाकर बच्चे को पैरों के बीच में आरामदायक मुद्रा में ‍‍लिटाएँ। फिर हाँथों में तेल लेकर बच्चों के पैरों की तरफ से मालिश शुरू करते हुए छाती व हाथ ‍तक ले जानी चाहिए। उसके बाद बच्चे को पीठ के बल लिटाकर मालिश का यही तरीका आजमाएँ। अंत में बच्चे के चेहरे व सिर की मालिश करनी चाहिए।

* फायदेमंद है मालिश :-
मालिश से बच्चे के शरीर की थकी हुई माँसपेशियों को आराम मिलता है। मालिश बच्चों को कई तकलीफों जैसे पसलियों का दर्द, थकान आदि से फायदा पहुँचाती है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और बच्चे के शरीर का विकास तेजी से होता है। मालिश से ‍शिशु की त्वचा में स्निग्धता व सुंदरता भी आती है।
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