जिसके कारण बच्चे खाने की प्लेट को देखते ही उस पर भूखों की तरह टूट पड़ते हैं। इन सभी से खराब होता है। उनके खाने का ढंग, जिसे देखकर हर कोई अपनी आँखे मूँद लेता है। ऐसे में माँ-बाप को बच्चे के खाने का टाइम-टेबल निश्चित करें तथा उसी के अनुसार बच्चे को खाना खिलाएँ। | | परिवार की नैय्या माँ-बाप के हाथ में है। अनुशासन व संस्कारों की पतवार से वे इस नैया को मझधार से पार कर सकते हैं। माँ-बाप को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसी परवरिश दे कि वह एक शिक्षित, संस्कारवान व सभ्य नागरिक बने तथा अपने परिवार व देश का नाम रोशन करे। |
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* कहीं भी कुछ भी उठा लेना :- बच्चों की यह आदत होती है कि उन्हें कहीं भी जो भी चीज अच्छी लगती है। वे उसे बगैर पूछे उठा लेते हैं। कई बार तो बच्चे अपने सहपाठियों के रबर, पेंसिल तक अपने बैग में रखकर ले आते हैं। उन्हें क्या पता कि चोरी क्या होती है? माँ-बाप को चाहिए कि वे अपने बच्चों को अच्छी आदतें सिखाए। * प्रेमपूर्वक रहें :- घर का माहौल बच्चों के दिलो-दिमाग व कार्यशैली पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। हर रोज घर-परिवार के झगड़े सुनकर व देखकर बच्चा भी वैसा ही सीखता है। जिससे वह भी झगड़ालू, चिड़चिड़ा व क्रोधी हो जाता है। घर के बड़ों को चाहिए वे आपसी कलह से बचें। जिससे घर का माहौल भी अच्छा बना रहता है और बच्चों में भी अच्छे गुण आते हैं। परिवार की नैय्या माँ-बाप के हाथ में है। अनुशासन व संस्कारों की पतवार से वे इस नैया को मझधार से पार कर सकते हैं। माँ-बाप को चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसी परवरिश दे कि वह एक शिक्षित, संस्कारवान व सभ्य नागरिक बने तथा अपने परिवार व देश का नाम रोशन करे। * इन बातों का रखें ख्याल :-* बच्चे कहाँ जाते हैं और क्या करते हैं? इस बात का विशेष ख्याल रखें। * बच्चों के गलती करने पर उन्हें मारने की बजाय प्यार से समझाएँ। * बच्चों को बड़ों का आदर करना सिखाएँ। * अपनी लड़ाई में बच्चों को शामिल ना करें। |