बच्चा जो कुछ भी सीखता है वो अपने आसपास के माहौल से सीखता है। बच्चे की परवरिश यदि अच्छे माहौल में की जाए तो बच्चा संस्कारवान व एक अच्छा नागरिक बनता है। जो देश, परिवार और समाज की उन्नति में सहायक होता है। बच्चे उस कच्ची माटी के समान होते हैं जिसे जिस आकार में ढालो वह वैसा ढ़ल जाते हैं। बच्चों में जो भी संस्कार आते हैं वो सबसे पहले उसे उसके माँ-बाप से व उसके परिवार से मिलते हैं। कई बार माँ-बाप की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना प्रवृत्ति बच्चों को संस्कारहीन, उग्र, क्रोधी व मनमौजी बना देती है। * अधिक लाड़, प्यार व दुलार :- | | बच्चों में जो भी संस्कार आते हैं वो सबसे पहले उसे उसके माँ-बाप से व उसके परिवार से मिलते हैं। कई बार माँ-बाप की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना प्रवृत्ति बच्चों को संस्कारहीन, उग्र, क्रोधी व मनमौजी बना देती है।
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बच्चों को आपके प्यार व स्नेह की आवश्यकता है लेकिन आवश्यकता से अधिक प्यार व दुलार बच्चों को बिगाड़ देता है। यह माँ-बाप को तब पता चलता है जब बच्चे किसी और के सामने अपने माँ-बाप को अपमानित करते हैं। अक्सर ऐसा देखने में आता है कि बच्चा किसी भी चीज की जिद पर ऐसा अड़ जाता है कि 'ना' कहने पर वह अपने माँ-बाप को ही मारना शुरू कर देता है या फिर घर का सामान उथल-पुथल करने लगता है। ऐसे में माँ-बाप शर्मिन्दा होकर अपनी गलतियों पर पश्चाताप करते हैं। * खाने की आदत सुधारें :- यह बहुत अधिक ध्यान देने योग्य चीज है कि आपका बच्चा कब, क्या और कैसे खाता है? माँ-बाप बच्चों को लाड़-प्यार में इतना कुछ खिलाते रहते हैं कि दिनभर बच्चों के मुँह में कुछ न कुछ चलता ही रहता है। इसी के साथ ही माँ-बाप बच्चों को खाने का सलीका भी नहीं सिखाते। |