इन सभी माध्यमों में सेक्स के सुंदर पक्ष को निरूपित न करते हुए उसे रोमांचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है जिसमें जिस्मफरोशी अधिक होती है प्यार कम। भले ही यह उनकी टीआरपी बढ़ाता है लेकिन इसके साथ-साथ ही बच्चों का भविष्य बिगाड़ने में भी वह कोई कसर नहीं छोड़ता। कामुकता, अश्लीलता का बच्चों के अविकसित मस्तिष्क पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है। | | एक तरफ शारीरिक बदलाव और दूसरी तरफ कामुकता को बढ़ाने वाला साहित्य ये सभी बच्चे की सोच पर एक बुरा प्रभाव डालते हैं। जिससे बच्चा इनके बारे में और अधिक जानना चाहता है। उसकी यही जिज्ञासा उसे वयस्कों की दुनिया टटोलने पर विवश कर देती है। |
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फिल्म में अश्लील दृश्य को देखकर हर बच्चे के मन में यह सवाल उठता है कि यह क्या हो रहा है। कभी-कभी तो बच्चा हिम्मत करके पूछ ही लेता है कि 'मम्मी ये क्या हो रहा है'। बच्चों के ऐसे प्रश्न पर माँ-बाप या तो चुप्पी साध लेते हैं या बच्चे की पिटाई करने लग जाते हैं। यदि बच्चों की जिज्ञासा का उसी वक्त शमन कर दिया जाए तो दोबारा वे ऐसे प्रश्न नहीं करेंगे। मगर हम हैं कि.... ? एक तरफ शारीरिक बदलाव और दूसरी तरफ कामुकता को बढ़ाने वाला साहित्य ये सभी बच्चे की सोच पर एक बुरा प्रभाव डालते हैं। जिससे बच्चा इनके बारे में और अधिक जानना चाहता है। उसकी यही जिज्ञासा उसे वयस्कों की दुनिया टटोलने पर विवश कर देती है। अध्ययनों के मुताबिक यौन शोषण के 70 प्रतिशत मामलों में अपराधी बच्चे अश्लील सामग्री देखने के आदी पाए गए।अपने बच्चों को भटकाव से सही राह पर ले जाना माँ-बाप की जिम्मेदारी है। आपका बच्चा खाली समय में क्या करता है, किससे मिलता है। यह माँ-बाप को बखूबी पता होना चाहिए। मारपीट से आपका बच्चा उग्र हो सकता है अत: उसे प्यार से समझाइए। उसके मन में अपने प्रति विश्वास पैदा करें न कि डर। |