एक वक्त था, जब झूमर रईसी का पर्याय माने जाते थे। बड़े से हॉल की छत से लटके झूमर सच में शान का प्रतीक ही लगते थे, लेकिन अब जमाना बदल गया है, तभी तो सिर्फ सजावट के लिए लगाए जाने वाले ये झूमर अब जरूरत के लिए लगाए जाते हैं।
अब घरों में सिर्फ बल्ब या ट्यूबलाइट लगाने से काम नहीं चलता है, बल्कि अब तो प्रकाश ऐसा हो कि बल्ब आपको सीधे न दिखे और रोशनी दीवारों और छत से रिफ्लैक्ट होकर सारे कमरे में प्रकाश फैला दे।
ऐसा हो सकता है, बशर्तें आप अपने घर के अनुरूप सही लैंप शेड और शेंडलियर (झूमर) चुन सकें। इन दोनों के सही चयन से घर को बिल्कुल नया लुक दिया जा सकता है। रोशनी और अँधेरे के सही सम्मिश्रण से कमरों में अलग ही आकर्षण जगाया जा सकता है। | एक वक्त था, जब झूमर रईसी का पर्याय माने जाते थे। बड़े से हॉल की छत से लटके झूमर सच में शान का प्रतीक ही लगते थे, लेकिन अब जमाना बदल गया है, तभी तो सिर्फ सजावट के लिए लगाए जाने वाले ये झूमर अब जरूरत के लिए लगाए जाते हैं। |
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वैसे तो शेंडलियर हर रेंज में मिलते हैं, लेकिन महँगे झूमर अच्छे-खासे टिकाऊ साबित होते हैं,क्योंकि आप बार-बार तो ऐसे आइटम खरीदेंगे नहीं, अतः एक बार इन पर किया गया खर्च सालों तक आपके कमरों को रोशनी में डुबोए रखता है।
हाँ, आप इन्हें खरीदते वक्त सावधानी जरूर रखें। जैसे ऐसी कोई फिटिंग न लें जिसे साफ करने में कठिनाई हो। कपड़े के शेड वाली फिटिंग में कपड़ा बल्ब से दूर रहे, वरना जलने का डर रहता है। यदि शीशे का शेंडलियर लें तो उसकी सफाई का तरीका पूछ लें। लाइट फिटिंग में कितने वॉट का बल्ब लगाना है, यह भी पूछ लें, ताकि बाद में शेड्स के शीशे तड़क न जाएँ।
कभी भी सिर्फ सजावट के लिए शेंडलियर न लगाएँ, क्योंकि इनको लगाने का उद्देश्य घर के कोनों, दीवारों तक लगी तस्वीरों, छत के कोनों पर रोशनी डालना नहीं होता है, बल्कि ये हिस्से भी जीवंत लगें।
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