जब भी हम किसी पर इल्जाम लगाएँ, तब केवल एक क्षण के लिए हमें उस व्यक्ति की मनःस्थिति की कल्पना करते हुए समझना चाहिए कि उसने ऐसा क्यों किया होगा? तभी हमें कोई निर्णय लेना चाहिए।
मेरा नम्र प्रयास है, अब जीवन के हेतु।
शायद दोहों से बने, ध्वस्त हुआ जो सेतु।।सिर्फ नजरिये ने किया, ऐसा एक कमाल।
मेरे लिए हराम जो, उसके लिए हलाल।।
सन्नाटा ठहरा हुआ, शायद तेरे गाँव।
इसीलिए गतिहीन हैं, शब्दों के शुभ पाँव।।