जीरो फिगर बुटिक पर शॉर्ट कुर्र्ते 'ट्राय' कर रही वो सामान्य कदकाठी की प्यारी-सी युवती कुछ परेशान-सी थी। एक के बाद एक कुर्ते पहनकर भी उसे संतुष्टि नहीं मिल रही थी। डिजाइनर को लगा शायद ये परेशानी इसलिए है कि ढेर में से वो एक पसंद नहीं कर पा रही है। उसने सहायता के उद्देश्य से पूछा-'क्या हुआ, सिलेक्शन में कन्फ्यूज हो?' 'नहीं आँटी, कुर्ते तो सभी अच्छे हैं लेकिन मैं मोटी हूँ ना!'
डिजाइनर ने हैरत से कहा-'तुम किस एंगल से मोटी लग रही हो, जरा बताओ तो? तुम्हारा शरीर एकदम फिट है।' 'नहीं आँटी मेरे सारे क्लासमेट मुझे मोटी कहकर ही बुलाते हैं। मैं क्या करूँ, अब तो मैंने डायटिंग भी शुरू कर दी है। पर कोई फर्क ही नहीं पड़ता।' लड़की ने रुआँसी होते हुए कहा।
ये उस एकमात्र लड़की से जुड़ी समस्या नहीं बल्कि तेजी से फैलता वह ट्रेंड है जिसकी चपेट में युवा आसानी से आ रहे हैं। वे उन भारतीय मॉडल्स और एक्टर्स की नकल करना चाहते हैं जो खुद हॉलीवुड तथा विदेशी मॉडल्स की नकल करने पर तुले हुए हैं। नकल का यह चक्कर उन्हें खतरे की हद तक बीमार बना रहा है। इस क्रे्रज को बिना आगा-पीछा सोचे बड़ी तादात में अपना रही हैं, युवतियाँ। ये क्रेज इस हद तक जा पहुँचा कि अधिकांश युवतियाँ कई तरह की बीमारियाँ पाल बैठी हैं। इनमें ज्यादातर 16-17 साल की युवतियाँ शामिल हैं।
इन सबकी रोल मॉडल होती हैं चिकने पन्नों या स्क्रीन पर दिखने वाली मॉडल्स और अभिनेत्रियाँ। उस समय वे यह नहीं सोचतीं कि मॉडल्स या अभिनेत्रियों के पास न केवल दक्ष फिटनेस ट्रेनर होते हैं बल्कि उनके डाइट रुटीन पर नजर रखने से लेकर चिकित्सकीय सुविधाएँ उपलब्ध करवाने तक हर चीज का ध्यान रखा जाता है वो भी बड़ी कीमत के एवज में। उनके लिए सुंदरता और फिटनेस काम मिलने की पहली शर्त होती है।
ज्यादातर वे सही तरीके से और हर कीमत पर इसके लिए कोशिश करती हैं। जबकि आम आदमी के लिए इतना सब करना मुश्किल या नामुमकिन ही होगा। साइज जीरो का जो फंडा फिलहाल प्रचलन में है, वो तो सभी के लिए गलत है चाहे आम युवती हो या मॉडल/एक्ट्रेस।
नया है ये भूत आज से लगभग 20 साल पहले जब दिल फिल्म के लिए माधुरी दीक्षित को बतौर हिरोइन साइन करने की बात आई तो विशेषज्ञों का कहना था- लड़की बहुत दुबली है, जँचेगी नहीं। फिल्म पिट जाएगी। ये बाद की बात है कि माधुरी ने अपनी अभिनय क्षमता के सामने सबको गलत साबितकर दिया और फिल्म सुपरहिट हुई। गौरतलब बात है कि तब तक भी बेहद दुबली महिलाएँ सुंदरता का पैमाना नहीं हुआ करती थीं।
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