- डॉ. भारती जोशी
चिलचिलाती धूप, गर्म लपलपाती हवा के झोकों में अपने दिल-दिमाग और मिजाज में ताजगी बनाए रखना बहुत ही मुश्किल है। फिर भी कुछ तौर-तरीके अपनाकर इस मौसम को प्रसन्नतापूर्वक झेल सकते हैं। चिपचिपे मौसम में पसीना आना जरूरी है। पसीना आने से शरीर की गर्मी निकलती है। साथ ही शरीर में पैदा होने वाला टॉक्सिक एसिड भी विसर्जित हो जाता है।
पसीना पैदा करने वाली दो तरह की ग्रंथियाँ होती हैं - एक्रीन तथा एपोक्रीन। एक्रीन ग्रंथियाँ तरल साफ पानी जैसा पसीना पैदा करती हैं, जबकि एपोक्रीन ग्रंथियाँ अपेक्षाकृत गाढ़ा सफेद रंग का स्वेद पैदा करती हैं। दूसरी तरह के पसीने से युवा ग्रस्त रहते हैं। पानी से अधिक देर तक जब कपड़े गीले हों तो बैक्टीरिया पैदा हो जाते हैं जिससे बदबू फैलती है। अत: बगलों में पसीने की दुर्गंधनाशक 'एंटीपर्सपिरेंट' का इस्तेमाल करें। साथ ही निम्नलिखित टिप्स अपनाएँ।
* सुबह ठंडे पानी से स्नान करें। दो-तीन बूँद यू.डी.कोलोन डालने से अधिक ताजगी महसूस होगी। काम से लौटने पर भी शाम को 'शावर बाथ' लें। | | चिलचिलाती धूप, गर्म लपलपाती हवा के झोकों में अपने दिल-दिमाग और मिजाज में ताजगी बनाए रखना बहुत ही मुश्किल है। फिर भी कुछ तौर-तरीके अपनाकर इस मौसम को प्रसन्नतापूर्वक झेल सकते हैं। चिपचिपे मौसम में पसीना आना जरूरी है। |
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* दिन में कई बार चेहरा, गर्दन और कलाइयाँ धोएँ। नल की धार के नीचे कलाई रखने से ताजगी मिलती है। प्रेशनर िटश्यू त्वचा से साफ करें। * स्नान के पश्चात हल्की सुगंधमय टेल्कम पावडर पूरे शरीर पर छिड़कें या बॉडी स्प्रे लगाएँ। * सिर की त्वचा संवेदनशील होती है। अत: धूप में कभी नंगे सिर न निकलें। हमेशा छाता रखें या दुपट्टे, साड़ी से सिर ढँक लें। * धूप में बालों से अधिक तेल निकलता है। इसलिए मृदु शैंपू से रोज बाल धोएँ। * कोलोन में रुई भिगोकर खोपड़ी की त्वचा पर रगड़ें, बहुत ठंडक मिलेगी।
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