देश के 110 नामी डिजाइनरों की शिरकत के साथ विल्स इंडिया फैशन वीक के 14वें सीजन की शुरुआत हुई। इस फैशन शो की खासियत यह रही कि पहली बार इस शो में पूरी फैशन इंडस्ट्री एक ही मंच पर एकजुट होती नजर आई और इस तरह इस शो ने कई पुराने व नवोदित फैशन डिजाइनरों को एक बेहतर मंच प्रदान किया।
आर्थिक मंदी के बादल छँटने के साथ ही वीकेंड पर शुरू हुआ यह फैशन वीक सभी डिजाइनरों के लिए फैशन बाजार में फिर से अच्छे कद्रदानों के मिलने की उम्मीद की एक किरण बनकर आया, वहीं मॉडल्स के लिए भी यह शो खास बना क्योंकि उन्हें पहली बार एक ही प्लेटफॉर्म पर कई बड़े डिजाइनरों के वस्त्रों की नुमाइश करने का मौका मिला। यह सब संभव हुआ फैशन इंडस्ट्री के एक हो जाने से। लेकिन यदि इस फैशन वीक की मूल चीज 'डिजाइनरों के कलेक्शन' की बात करें तो उस लिहाज से यह शो पूरी तरह से केवल धूम-धड़ाके व हल्ले-गुल्ले के नाम रहा। फीका-फीका सा रहा विल्स फैशन वीक : हालाँकि इस फैशन वीक की शुरुआत और अंत दोनों ही बड़े धूम-धड़ाके व चकाचौंध के साथ हुए। परंतु यदि हम पूरे शो की बात करें तो ओवरऑल यह पूरा शो फ्लॉप रहा। इस शो को देखकर तो ऐसा ही लगा मानो इन फैशन डिजाइनरों ने शो के बहाने रैंप पर केवल सितारों की भीड़ इकट्ठी की और उनसे अपनी तारीफ के शब्द उगलवाए।
बलात्कार के आरोपी अपने भाई आनंद जॉन की रिहाई के लिए अभियान चला रही संजना जॉन ने भी इस फैशन शो के माध्यम से अपना काम निकलवाने का और लोगों की सहानुभूति बटोरने का पूरा-पूरा प्रयास किया। यही कारण है कि अपने भाई के प्रति प्रेम को दर्शाने वाली संजना ने उतावलेपन में अपने कलेक्शन में बॉलीवुड के कई सितारों को भाई-बहन की जोड़ियों के रूप में ताबड़तोड़ रैंप पर उतारा।
PTI
PTI
लेकिन सलमान-सोहेल, राइमा-रिया, सुष्मिता-राजीव, अमान-अयान आदि से सुशोभित संजना का फैशन शो हो-हल्ला और अफरा-तफरी से ज्यादा कुछ नहीं सिद्ध हुआ। उल्टा संजना के सहयोग के लिए आए सलमान को बेकाबू होते भीड़ को देखते हुए बिना कुछ कहे उल्टे पैर घर लौटना पड़ा।
संजना की ही तरह जयाप्रदा और कपिलदेव को रैंप पर कैटवॉक कराने वाली आशिमा-लीना के 'गो-ग्रीन' कलेक्शन ने भी कुछ खासा कमाल नहीं दिखाया और फैशन के दीवानों को निराश किया।
आशीमा के कलेक्शन के गहरे रंग फैशन प्रेमियों को नागवार गुजरे और उन्होंने इन्हें एकसिरे से नकार दिया।
इस पूरे फैशन वीक में रैंप पर बॉलीवुड ही छाया रहा। किसी डिजाइनर ने बॉलीवुड कलाकारों को रैंप पर कैटवॉक कराई तो किसी ने मॉडलों को बॉलीवुड की फिल्मों के डॉयलाग लिखे वस्त्रों को पहनाकर। रैप पर मॉडल की जगह सितारे क्यों : सितारों का आमजन के बीच जाने का सीधा मक्सद अपनी फिल्मों का प्रमोशन करना व प्रशंसकों की भीड़ जुटाना होता है। फिर भले ही इस काम के लिए ये किसी शो को होस्ट करने के या रैंप पर कैटवॉक करने के दस बहाने क्यों न ढूँढ़ ले। सितारों के द्वारा अपने उल्लू को सीधा करने के लिए रैंप को हाइजैक कर मॉडल्स की जगह लेना भले ही फैशन डिजाइनरों को न खटके परंतु रैंप पर कैटवॉक करने वाले मॉडलों को जरूर यह नागवार गुजरता है।
PTI
PTI
विल्स फैशन वीक के अंतिम दिन कैटरीना कैफ और रणवीर कपूर रैंप पर कैटवॉक करने के लिए नहीं बल्कि अपनी फिल्म 'अजब प्रेम की गजब कहानी' के प्रमोशन के लिए आए थें। ऐसे में लोगों का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए उन दोनों ने रैंप पर बखूबी कैटवॉक की। इसी प्रकार इस पूरे फैशन वीक में सलमान खान, सुश्मिता सेन, जयाप्रदा, राइमा सेन रिया सेन, अभय देओल आदि कई छोटे-बड़े सितारों ने रैंप पर पूरी तरह से अपना कब्जा जमाया।
कई बार तो बॉलीवुड की ऐसी हस्तियाँ रैंप पर कैटवॉक करती है, जिनका यौवन अब गुजरा जमाना हो गया है। उनके चेहरे की झुर्रियाँ व मोटापे से भरा शरीर रैंप की खूबसूरत माहौल को फीका-फीका और गंभीर बना देता है फिर भले ही वो गुजरे जमाने की अभिनेत्री व सांसद जयाप्रदा हो या फिर पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी कपिल देव हों।
फैशन डिजाइनरों द्वारा इन्हें रैंप पर लाने का मकसद आमजन की समझ से तो परे ही है। न जाने रैंप की शोभा पर ग्रहण लगाने वाले ऐसे गुजरे जमाने के अभिनेता व खिलाड़ियों को रैंप पर क्यों लाया जाता है? सितारों की बजाय कलेक्शन पर ध्यान दें : केवल मीडिया के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए ये डिजाइनर बॉलीवुड के सितारों की मदद लेते हैं। इन सितारों की बजाय यदि ये अपने कार्य पर अधिक ध्यान दें तो शायद ये फैशन शो बॉलीवुड के सितारों के नाम नहीं बल्कि इन मेहनती फैशन डिजाइनरों के नाम रहें। रितु बेरी के शो में जहाँ 'देव डी' के देवदास अभय देओल ने कैटवॉक की वहीं रोहित बल के फैशन शो में 'अजब प्रेम की गजब कहानी' फिल्म के सितारे रणवीर कपूर और कैटरीना कैफ ने।
फैशन डिजाइनरों का मकसद फैशन के नाम पर लोगों की भीड़ इकट्ठी करने के बजाय अपने कलेक्शन से फैशन को दीवानों को शो तक खींच लाना होना चाहिए। सितारों के आने की भनक लगते ही इन फैशन शो के हॉल फैशन प्रेमियों की बजाय सितारों के प्रशंसकों से भर जाते हैं, जिससे डिजाइनरों की प्रतिभा का सही आकलन नहीं हो पाता है और ये शो फेमस होते-होते फ्लॉप हो जाते हैं।