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मनमोहन सिंह रैंप पर
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यदि कोई आपसे पूछे कि फैशन क्या है? तो इस सवाल का आपके पास एक साधारण सा जवाब होगा कि 'जो भीड़ से हटकर से दिखे, वह फैशन है। फिर चाहे वह लड़कियों का कुरते पर जिंस पहनना हो या फिर लड़कों का शर्ट पर चुन्नी डालना हो।' जो कुछ भी उलट-पुलट हो, वही युवाओं के लिए अब फैशन बन चुका है।

पूरी दुनिया में फैले फैशन के इस वृहद बाजार का सबसे बड़ा कद्रदान हमारा युवा वर्ग है। जिसे लुभाने के लिए बॉलीवुड के नामी सितारों को रैंप पर कैटवॉक करवाकर उनसे इन डिजाइनर की वाहवाही व प्रशंसा के शब्द उगलवाए जाते हैं तथा यह दिखाने का प्रयास किया जाता है कि ये सितारे भी इनके कलेक्शन के दीवाने हैं।

फिर भले ही असल जिंदगी में इन सितारों का इन डिजाइनरों से केवल 'किराए के किरदार' का ही रिश्ता क्यों न हो। आखिरकार बेचारे इन फैशन डिजाइनरों की दुकानें बॉलीवुड के सितारों से ही चलती है और सितारों का प्रोफेशन फैशन डिजाइनरों से।

बॉलीवुड सितारों की तर्ज पर खिलाड़ी :
फैशन डिजाइनर ही तो वो हुनरमंद लोग होते हैं, जो गुमनामी के अंधेरों में खोई श्रीदेवी और अधेड़ उम्र की पुरानी अदाकारा जयाप्रदा के जलवों को फिर से जिंदा कर देते हैं और उन्हें प्रसिद्धि की ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।

एक ही दिन में यदि डिजाइनर की एक ड्रेस पहनने से पैसा और वाहवाही दोनों मिले तो भला खिलाड़ी और गायक कलाकार भी इस लूटमार से पीछे कैसे रह सकते हैं। बॉलीवुड के सितारों की तर्ज पर ये लोग भी चकाचौंध की इस गंगा में डुबकी अवश्य लगाते हैं फिर चाहे वह कपिल देव हो या महेंद्रसिंह धोनी। सुनने में आया है कि आजकल तो फैशन के इस रंग में रंगने के लिए राजनेता भी पिछले दरवाजे से दस्तक देने लगे हैं।

फैशन वीक
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उल्टे-सीधे कपड़ों की फैशन :
फैशन को बाजार में लाने का सारा दारोमदार हमारे फैशन डिजाइनरों पर होता है, जो हर बार कभी रंगीन कपड़ों की छोटी-बड़ी कुतरनों को जोड़कर तो कभी कपड़ों पर फैशनेबल चप्पल-जूते या लंबी-लंबी चूड़ियाँ लटकाकर फैशन शो में अपने जलवे बिखेरते हैं।

इन डिजाइनरों का मुख्य उद्देश्य भीड़ का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना होता है फिर चाहे वे अपने कलेक्शन में मॉडल की कमर के नीचे के कपड़े में तिरंगे का इस्तेमाल करें या फिर मनमोहन सिंह की तस्वीर का।

आमतौर पर फैशन शो में मॉडलों को वे पोशाकें पहनाई जाती हैं, जो उनके तन ढँकने मात्र का काम करती है इसलिए कुछ फैशन डिजाइनरों के कलेक्शन में बहुत कम या नाम मात्र के कपड़ों में मॉडलों को रैंप पर उतारा जाता है और खूब वाहवाही बटोरी जाती है।

इन मॉडलों को पहनाए जाने वाले कपड़ों में से कुछेक ही ऐसे होते है, जिन्हें आम भारतीय महिला या पुरुष पहन सकते हो। ये कपड़े तो केवल फैशन शो के लिए ही मॉडलों के बदन पर कामचलाऊ तरीके से जैसे-तैसे करके लटकाए जाते हैं। ऐसे में इन मॉडलों की साड़ी का आँचल ढलकना या कपड़ों का उतरना तो स्वाभाविक ही होगा।

फैशन के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपयों को पानी की तरह बहाने के पर्याय बने ये फैशन शो भले ही भारत में होते हैं परंतु इनमें लांच किया वाला कलेक्शन भारतीय नहीं बल्कि विदेशी युवक-युवतियों के खुलेपन का प्रतिनिधित्व करता है तथा उन्हीं के पहनने लायक होता है।

भारतीय संस्कृति का मखौल उड़ाते डिजाइनर :
बाजार में आने वाला फैशन का नया ट्रेंड निर्धारित करने वाले ये फैशन डिजाइनर जिस तरह से भारत की सभ्यता और संस्कृति का मखौल उड़ा रहे हैं। उससे तो यही लगता है कि ‘मनमोहन’ के बाद अब देर नहीं है जब प्रतिभा पाटिल और सोनिया गाँधी भी इन मॉडलों की स्कर्ट व पतलून के पिछले हिस्से पर मुस्कुराती नजर आएँगी। यदि यह सब कुछ बदस्तूर जारी रहा तो जल्द ही ये फैशन डिजाइनर जल्द ही राष्ट्रपिता 'महात्मा गाँधी' को रैंप पर ले आएँगे।

माया और चकाचौंध के इस युग में फैशन की आँधी में रैंप पर कैटवॉक करती इन आधुनिक मेनकाओं की पोशाकों में गणेश व विक्रम-बेताल के बाद अब जल्द ही आपको बाल ब्रह्मचारी हनुमान भी देखने को मिल जाएँगे। अगर ऐसा होता भी है तो चौंकिएगा मत, यही तो असली आधुनिक भारत है जहाँ रैंप पर कैटवाक करते मॉडल के वस्त्रों का खुलना और विल्स इंडिया फैशन वीक में भारत के 'राष्ट्रपति' का युवतियों की पोशाकों पर शोभायमान होना ... यह सब अब एक आम बात बन गई है। जिस पर केवल चिल्ला चोट होती है कोई ठोस कार्रवाई नहीं।
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