जहाँ महिलाओं को बड़ी और वर्क वाली बिंदिया लुभा रही है। वहीं नन्हीं बालिकाओं को चमकीली गोल्डन, सिल्वर बिंदिया पसंद आ रही है।
गोंद वाली बिंदियों के अलावा आजकल लिक्विड बिंदी भी प्रचलन में है। इसकी खासियत यह है कि इससे मनचाही आकृति बनाई जा सकती है।
* आज भी दाम हैं कम :- फैशन के इस दौर में भी महिलाओं के माथे से बिंदिया लुप्त नहीं हो पाई है। इसका एकमात्र कारण महँगाई के इस दौर में आज भी बिंदिया का सस्ते दामों पर उपलब्ध होना है।
वर्क के हिसाब से बिंदिया का दाम भी बढ़ता जाता है। जहाँ प्लेन बिंदी का पैकेट बाजार में 1 से लेकर 10 रुपए तक मिलता है वहीं वर्क वाली फैशनेबल बिंदी का पैकेट 10 से लेकर 60 रुपए तक मिलता है।
* त्योहारों पर खास :- यूँ तो हर रोज महिलाएँ बिंदी लगाती हैं परंतु हर तीज-त्योहारों पर माथे पर बिंदी लगाना भारतीय महिलाओं की अनिवार्यताओं में शामिल होता है।
इसे सुहागन महिलाओं का प्रतीक मानकर घर की बहन-बेटियों को अनेक त्योहारों जैसे रक्षाबंधन, गोद-भराई, विवाह पर साड़ी के साथ भेंट किया जाता है।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि बिंदी नारी के सौंदर्य को बढ़ाती है। यह हर उम्र की नारी पर फबती है। बिंदी एक फैशनेबल वस्तु होने के साथ-साथ नारी को परिपूर्णता भी प्रदान करती है। माथे पर तारों सी झिलमिलाती बिंदी नारी के व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाकर उसमें गजब का आर्कषण भर देती है।
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