- मधुलिका
फैशन में इतिहास की वापसी कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर पुराने जमाने के पहनावे और श्रृंगार नए ज़माने के डिज़ाइनरों को आकर्षित करते रहते हैं और वे इनसे प्रेरित होते रहते हैं। बहरहाल... इस बार ज्वेलर्स तथा डिजाइनर्स प्रभावित हुए हैं राजा-महाराजाओं के जमाने की हेयर ज्वेलरी से।
फैशन का मतलब ही है नए-पुराने का मिश्रण। समय के साथ-साथ फैशन बदलता जरूर है, लेकिन उसका आधार वही पुराना फैशन रहता है। इस फैशन जगत पर जिस एक और जगत का प्रभाव पड़ता है, वह है फिल्म जगत। फैशन और फिल्में आज एक-दूसरे के पर्याय बन चुके हैं। लिहाजा किसी एक फिल्म में की गई साज-सज्जा आने वाली कई-कई फिल्मों तक प्रतिध्वनित होती हैं।
नई हेयर ज्वेलरी पर भी इसका असर दिखाई देता है। देवदास, जोधा अकबर, हम दिल दे चुके सनम, नई उमराव जान आदि ऐसी ही कुछ फिल्मों के नाम हैं, जिनमें हेयर ज्वेलरी पर खासा ध्यान दिया गया और बालों के लिए ठेठ पुरानी भारतीय-मुगल शैली में गहने बनाए गए। ये गहने आम जनता ने भी पसंद किए और अब डिज़ाइनर्स तथा ज्वेलर्स ने बड़ी संख्या में शुद्ध सोने से बने ऐसे गहने बाजार में ला दिए हैं।
इनमें पारंपरिक राजपूताना माँग टीका, मुगलों के समय के झूमर, जूड़ा पिन, टिकली (माँगटीके का संक्षिप्त रूप) वेणी, हेयर पिन्स, क्राउन (मुकुट) आदि शामिल हैं। यदि आप लंबे बालों की मालकिन हैं तो अपनी चोटी जितनी लंबाई की वेणी सजाइए और छोटे बालों पर हेयर पिन्स, क्राउन्स तथा टीका सजा लीजिए। जूड़ा बनाकर आप उसमें छोटे-छोटे कई जूड़ा पिन सजा सकती हैं या मुगल बेगमों की तर्ज पर साइड में झूमर लटका सकती हैं। जैसी चाहें वैसी हेयर स्टाइल पर आप किसी खास अवसर पर इन गहनों को पहन सकती हैं।
वो भी लहंगा, साड़ी, सलवार कमीज़ और यहाँ तक कि शर्ट ट्रा़उजर पर भी। देश के कुछ प्रसिद्ध ज्वेलर्स और डिज़ाइनर्स ने तो बकायदा ढेर सारी वैराइटी के साथ इन हेयर एसेसरीज की पूरी श्रृंखला लाँच की है। इनमें हीरे, मीना, रूबी, नग आदि के काम किए जाते हैं तथा वेट के हिसाब से इनके दाम निर्धारित होते हैं। बालों के लिए बन रही ये स्पेशल ज्वेलरी मुख्यतः सोने से बनाई जा रही है, लेकिन कम दाम पर भी आप इन्हें चाँदी पर सोने की पॉलिश या फिर मैटल में खरीद सकती हैं।
पारंपरिक परिधानों तथा गहनों का क्रेज हमेशा बना रहता है। यही कारण है कि भारतीय महिलाएँ वार-त्योहार या खास मौकों पर साड़ी, लहंगा जैसे परिधान पहनना पसंद करती हैं। ऐसे में पारंपरिक गहनों से अच्छा विकल्प दूसरा नहीं होता। इसलिए फैशन जगत में भी इस क्षेत्र में नए प्रयोग होते रहते हैं। हेयर एसेसरीज का बढ़ता क्रेज इसका ही एक उदाहरण है। क्यों ना सजाएँ सोना-चाँदी जुल्फों में।
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