दिल्ली में मणिपुर की 19 वर्षीय एक युवती रामचंपी की हत्या ने उत्तर-पूर्व से आई लड़कियों की स्थिति की ओर एक बार फिर सबका ध्यान आकर्षित किया है। लड़की की हत्या ने दूर-दराज से अध्ययन और आजीविका के सिलसिले में राजधानी आईं इन लड़कियों की सुरक्षा और उनकी सामाजिक स्वीकार्यता के बारे में फिर से सवाल उठा दिया है।
दिल्ली में मणिपुरी युवती की हत्या के बाद उत्तर-पूर्व की अधिकतर छात्राओं ने शेष भारत की मानसिकता पर भी सवाल उठा दिया है। लड़कियों का मानना है कि अपनी इज्जत बचाने के फेर में जान देने वाली लड़की का मामला सबके सामने आने के बाद भी क्या उत्तर-पूर्व की लड़कियों को दोस्ती और शारीरिक संबंधों के मामले में ‘खुली’ मानी जाने वाली शेष भारत की मानसिकता में कोई बदलाव आएगा।
दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहने वाली नागालैंड निवासी दीघा ने कहा 'उत्तर-पूर्व की लड़कियों के बारे में दिल्ली के लोगों की मानसिकता है कि वे लड़कों के साथ दोस्ती, यहाँ-वहाँ घूमने और शारीरिक संबंधों के मामले में बहुत खुली होती हैं। जबकि हमारे इलाकों की लड़कियाँ अक्सर अपने इलाके के लड़कों की ही मदद लेना पसंद करती है क्योंकि दूसरे लड़के हमारी दोस्ती को भी अन्यथा लेने में समय नहीं लगाते।'
दीघा ने शिकायत के स्वर में कहा 'सब जान गए हैं कि रामचंपी नाम की उस लड़की ने उस लड़के की बदनीयती का विरोध किया और उसने रामचंपी की जान ले ली। क्या इस घटना के बाद भी लोगों को हमारे चरित्र पर शक करने और हमारे व्यवहार को खुला मानने का अधिकार है।'
शेष भारत से शिकायत प्रकट करते हुए सिक्किम की तेमछा ने कहा 'अभी तक हम सिर्फ क्षेत्रीयता का शिकार होते थे, लेकिन अब यह नया खतरा हमारे सामने आने लगा है। दिल्ली जैसी जगह में हमें हर वक्त असुरक्षा का एहसास होता है।' तेमछा ने कहा 'कहने को राजधानी में महिलाओं और अल्पसंख्यकों के लिए बहुत से गैर सरकारी संगठन काम करते हैं, लेकिन रोजमर्रा की जिंदगी में ढेरों समस्याओं का सामना करने वाली हम जैसी लड़कियों की मदद के लिए कोई संगठन आगे नहीं आता।'
तेमछा ने कहा 'ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के साथ हिंसा की घटनाओं पर देश भर में कोहराम मचता है, लेकिन हमारे ही देश में हमारे साथ जो होता है, उस पर सभी आँख मूँद लेते हैं। स्थानीय लोग हमारे साथ ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे हम किसी दूसरे देश से आए हों।'
नागालैंड से दिल्ली आई रिंपा ने कहा कि एक तरफ सरकार अरुणाचल प्रदेश को देश का अभिन्न हिस्सा बताती है, उत्तर-पूर्व के प्रांतों में पर्यटन को बढ़ावा देती है, दूसरी ओर उन स्थानों से निकल कर बाहर आने पर हमें सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं देती। रिंपा ने कहा 'हमें अक्सर खुले व्यवहार वाली और ‘फ्री’ लड़कियाँ मान कर न सिर्फ लड़के, बल्कि उम्रदराज पुरूष भी र्दुव्यवहार करने की कोशिश करते हैं।
जब सभी जगह की लड़कियाँ उसी तरह की वेशभूषा धारण किए रहती हैं, ऐसे में सिर्फ हमें निशाना बनाने की कोशिश क्यों होती है। हमें कहीं आसानी से मकान नहीं मिलते और मिलने पर भी हमारी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।'
रिंपा ने कहा 'कॉलेज से लौटते समय एक बार लड़कों के एक समूह ने दोपहर के समय हम चार लड़कियों के साथ बदतमीजी करने की कोशिश की। हमने शोर मचाया, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया। ऐसे में हम किस पर भरोसा करें। यह अपने ही देश में बेगानों जैसा व्यवहार नहीं तो और क्या है। क्या हम इस देश के निवासी नहीं हैं। क्या हम इस देश को प्यार नहीं करते।'