- संगीता लोकेंद्र नामजोशी आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी में भावनात्मक एवं शारीरिक सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा भी अति आवश्यक है और हमारे जीवन के जोखिम को आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जा सकता है बीमा द्वारा। यह विडंबना ही है कि हमारे पुरुष प्रधान समाज में आज भी जब बीमा करवाने की बात आती है तो महिलाओं को दोयम दर्जा ही दिया जाता है। आज के बदलते परिवेश में महिलाएँ पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तत्पर हैं और काफी हद तक परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी वहन कर रही हैं। ऐसे में जरूरी है कि उनकी अनुपस्थिति में होने वाली आर्थिक क्षति की पूर्ति हेतु उनका जीवन बीमा करवाया जाए। साथ ही स्वास्थ्य बीमा भी जरूरी है। बीमा योजनाओं के लाभ :ये आपके बाद आपके परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान करती है। पॉलिसी की अवधि पूर्ण होने पर आप एकमुश्त बड़ी राशि प्राप्त कर सकती हैं, जिससे आप आपके बड़े दायित्वों जैसे बच्चों की शादी, पढ़ाई आदि का निर्वहन कर सकें। वैसे इस तरह का लाभ आप बीमा के अलावा अन्य योजनाओं में निवेश करके भी ले सकती हैं। धन वापसी योजनाओं के अंतर्गत एक निश्चित समय के अंतराल पर निश्चित धनराशि प्राप्त की जा सकती है, ताकि आपकी छोटी जरूरतें समय पर पूर्ण हो सकें। पेंशन योजना लेने पर आप आपका बुढ़ापा सुरक्षित कर सकती हैं। यदि आपका परिवार पूरी तरह आपकी आय पर ही निर्भर है तो यह बहुत जरूरी है कि आप टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी लें। इसमें परिपक्वता पर तो कोई राशि प्राप्त नहीं होती लेकिन बहुत कम प्रीमियम पर बड़ा सुरक्षा कवर मिल जाता है। कुछ योजनाओं में बीमारी विशेष होने पर बीमा कंपनी द्वारा इलाज हेतु कुछ राशि अग्रिम दे दी जाती है। हेल्थ पॉलिसी लेने पर अस्पताल का खर्च बीमा कंपनी वहन करती है। बीमा पॉलिसी के प्रीमियम पर आयकर की छूट भी प्राप्त की जा सकती है। यदि आप स्वयं आयकरदाता हैं तो स्वयं छूट प्राप्त कर सकती हैं, अन्यथा आपके पति भी आपकी प्रीमियम पर आयकर की छूट प्राप्त कर सकते हैं। पॉलिसी चुनने से पहले ध्यान दें:दायित्वों का आकलन : भविष्य में आने वाले अपने छोटे-बड़े दायित्वों का अनुमान लगाकर पॉलिसी का चुनाव करें। प्रीमियम भरने की क्षमता : दायित्व आकलन के साथ ही प्रीमियम राशि भरने की क्षमता का विचार भी अत्यंत आवश्यक है। आय के अनुसार ही प्रीमियम का चयन करें। यह प्रीमियम आप मासिक, त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक, वार्षिक या एकमुश्त जमा कर सकती हैं। प्रीमियम आपकी आय के अनुसार आसानी से जमा कर सकें, ऐसी योजना ही स्वीकार करें। अनुबंध को तोड़ें नहीं : एक बार बीमा पॉलिसी करवाने के बाद बीमा कंपनी और आपके बीच निश्चित अवधि के लिए अनुबंध स्थापित हो जाता है। अतः अवधि पूर्ण होने से पहले प्रीमियम भरना बंद नहीं करें, अन्यथा योजना के पूर्ण लाभ आप प्राप्त नहीं कर सकतीं। किसी भी योजना में कम से कम तीन वर्ष प्रीमियम अवश्य भरें। वास्तविक जानकारी दें : बीमा पॉलिसी लेते समय बीमा प्रतिनिधि द्वारा पूछी गई समस्त जानकारी वास्तविक एवं सही देना चाहिए। यह जानकारी आपके स्वास्थ्य एवं परिवार के बारे में होती है। गलत जानकारी देने पर पॉलिसी के लाभ बीमा कंपनी द्वारा निरस्त किए जा सकते हैं। सही बीमा एजेंट का चुनाव : आप जिस एजेंट से बीमा पॉलिसी ले रही हैं उसे भी परख लें। देखें कि उसे बीमा क्षेत्र का सही ज्ञान है या नहीं, वह आपको आपकी जरूरत के अनुसार विभिन्न योजनाओं से ज्ञात करवाता है या नहीं। एजेंट का रवैया सहयोगात्मक होना चाहिए, क्योंकि वह दीर्घ अवधि के लिए आपके और बीमा कंपनी के मध्य की कड़ी है।सही बीमा कंपनी का चुनाव : आप जिस बीमा कंपनी से बीमा करवाने जा रही हैं, उस कंपनी की भी पूर्ण जानकारी हासिल कर लें। आज हमारे देश में कई निजी जीवन बीमा कंपनियाँ भी कार्यरत हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप कंपनी की साख, सेवाएँ एवं कोष के बारे में भी जानकारी रखें। |