- शहनाज सुल्तान आज पॉलीथिन की थैलियों ने खरीददारी के सामान को लाने, ले जाने के लिए "कपड़े का झोला" साथ लेकर चलने के बंधन से हमें मुक्ति दिलाई है। परंतु इन पॉलीथिन की थैलियों की प्रकृति को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। पिछले कुछ समय से इसकी उपयोगिता को बढ़ावा ही मिला है। औद्योगिक उपयोग की वस्तु हो या घरेलू जरूरत की, जैसे कपड़े या अनाज, यहाँ तक कि खाद्य पदार्थ भी इसके बिना तैयार नहीं होते। याद कीजिए वो समय जब हम बाजार जाते समय कपड़े की थैली या झोला इस्तेमाल में लाते थे। जो घर की स्त्रियाँ सिलाई मशीन या हाथ की कशीदाकारी से तैयार करती थी। आज आधुनिकता और "मॉल कल्चर" ने इन्हें प्रतिस्पर्धा के दौर में पीछे धकेल दिया है और हम जीने लगे हैं एक "सिंथेटक-कल्चर" में। कपड़े की थैलियाँ हम पुरानी चादरों से या पुराने कवर से बना सकते हैं या फिर हम "पेपर मेश" या एम्पोरियम में मिलने वाले पेपर से भी "इको फ्रेंडली" बैग तैयार कर सकते हैं। इस प्रकार बनाए गए "बैग" रोजगार भी उपलब्ध करा सकते हैं और समाज को प्रदूषित करने वाली "पॉलीथिन" की माँग को कम करने में भी बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं। आवश्यकता है हमें इसके घातक प्रभावों को रोकने की। हाथ की या पेपर की थैलियों को अपनाकर, इसकी विशेषताओं को स्वीकार कर एक बार फिर चलन में लाना होगा। कपड़े की थैली साथ लेकर चलने के मानसिक अवरोध को दूर करना होगा। पॉलीथिन अपनाकर जाने-अनजाने हम मूक पशुओं के साथ हिंसा ही कर रहे हैं। पॉलीथिन की थैलियाँ खाने से हजारों गाएँ तड़प-तड़प कर मर रही हैं। यहाँ-वहाँ बिखरी हजारों थैलियाँ नदी, नालों, तालाबों, बाग-बगीचों को प्रदूषित कर रही हैं क्योंकि ये थैलियाँ नष्ट नहीं होतीं। इसके बढ़ते प्रभाव को हम पूरी तरह खत्म तो नहीं कर सकते, परंतु प्राकृतिक साधनों के द्वारा हम इनके उपयोग को तो कम कर ही सकते हैं। यदि हम बहुतायत में "कपड़े की थैली" या "पेपर बेग्स" तथा झोलों का चलन बढ़ाएँ तो न केवल खुद कई घातक प्रभावों से बच सकते हैं बल्कि पर्यावरण को भी बचा सकते हैं। क्योंकि, ये बात तो हमें पता ही नहीं कि हम जो भोज्य पदार्थ पॉलीथिन में घर लाकर चटखारे के साथ खाते हैं, वो संभवतः "किसी घातक बीमारी से ग्रस्त मरीज के उपयोग में लाई गई सीरिंज को गलाकर बनाई गई हो, या जूते-चप्पल गलाकर। यदि हम व्यापारी वर्ग से पॉलीथिन ना लेने का संकल्प करें तो ये उपाय कारगर हो सकता है। इसके खिलाफ जन-जागृति फैलाना चाहिए। यदि समय रहते इस समस्या का निदान न किया गया तो हमें इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। तो कपड़े के झोले और पेपर बेग्स की उपयोगिता को बरकरार रखें और शुरू हो जाएँ अपनी सिलाई मशीन पर कुछ-नए, कुछ-पुराने, कुशन व चादर या तकिए के खोलों के साथ। |