- विवेक कुमार समाज अक्सर कुछ परिभाषाएँ अपने हिसाब से गढ़ लेता है, जो कभी-कभार किसी छोटे-मोटे उदाहरण पर टिकी हो सकती हैं, लेकिन बाद में नियम और धारणा बनाकर लाद दी जाती हैं। ऐसे ही कुछ 'मिथ' कामकाजी महिलाओं से भी जुड़े हैं, जबकि असलियत उनसे कहीं अलग है। आइए जानें इनको और बदलें सोच पुरानी।
लड़कियाँ पॉलिटिक्स नहीं करतीं माना जाता है कि लड़कियाँ हमेशा पॉलिटिकली करेक्ट रहती हैं। यानी दफ्तर में वे कभी किसी तरह की पॉलिटिक्स नहीं करतीं। गुट नहीं बनातीं। सिर्फ अपने काम से मतलब रखती हैं। सचाई यह नहीं है। सचाई यह है कि लड़कियाँ भी ऑफिस पॉलिटिक्स में उतना ही लगाव रखती हैं, जितना कि पुरुष।
लड़कियाँ नाजुक होती हैं यह व्यक्तिगत ही नहीं एक सामाजिक भ्रम भी है। दुनिया के हर समाज में लड़कियों को लड़कों के मुकाबले कमजोर माना जाता है। मगर मजे की बात यह है कि कमजोर मानने का भाव सिर्फ भावनात्मक स्तर तक ही सीमित होता है। व्यवहार में पुरुष नाजुक मिजाज औरतों के लिए किसी तरह की रियायत नहीं बरतता। विभिन्न सर्वेक्षणों से साबित हुआ है कि महिलाएँ आमतौर पर पुरुषों से ज्यादा काम करती हैं। | | समाज अक्सर कुछ परिभाषाएँ अपने हिसाब से गढ़ लेता है, जो कभी-कभार किसी छोटे-मोटे उदाहरण पर टिकी हो सकती हैं, लेकिन बाद में नियम और धारणा बनाकर लाद दी जाती हैं। ऐसे ही कुछ 'मिथ' कामकाजी महिलाओं से भी जुड़े हैं, जबकि असलियत उनसे कहीं अलग है। |
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सेना, पुलिस, एयरफोर्स, मैरीन जैसे तमाम मोर्चों पर महिलाओं ने साबित किया है कि वे उतनी नाजुक मिजाज नहीं होतीं, जितना समझा जाता है। ग्रामीण महिलाओं की जीवनचर्या सुबह पुरुषों से पहले शुरू होती है और रात में पुरुषों के सोने के बाद खत्म होती है।
लड़कियाँ बेहद खर्चीली होती हैं आमतौर पर माना जाता है कि लड़कियों को शॉपिंग करने का नशा होता है। इस तरह वे बेहद खर्चीली होती हैं। मगर हकीकत इसके उलट है। विभिन्न सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है कि कभी-कभार लंच ब्रेक के दौरान अपने दफ्तर से नीचे उतरकर महिलाएँ शॉपिंग भले ही कर लेती हों, मगर औसतन उनका खर्च दफ्तर के पुरुष सहकर्मियों के मुकाबले काफी कम होता है। फिर भी उन्हें खर्चीली होने की पदवी मिली हुई है।
अगर ऐसा होता तो घरों का बजट महिलाएँ नहीं पुरुष बना रहे होते। महिलाएँ जितनी शॉपिंग को लेकर चौकन्नी होती हैं, पुरुष उसके 10 फीसदी भी नहीं होते। डिस्काउंट, सेल या स्कीम के तहत शॉपिंग करने में महिलाएँ पुरुषों से कई गुना आगे होती हैं। फिर उन्हें खर्चीली कैसे माना जा सकता है।
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