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हॉस्टल : स्वावलंबी जीवन की पहली सीढ़ी  Search similar articles
- डॉ. भारती जोश
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अधिकांश लोगों की नजरों में हॉस्टल की छवि अच्छी नहीं होती है, क्योंकि कुछ 'हॉस्टल' अपने व्यवहार से अवश्य ही बुरी छवि बनाते हैं पर हॉस्टल आत्मनिर्भरता की प्रथम सीढ़ी है, जहाँ आत्मविश्वास, मिलनसारिता, सहयोग जैसे गुण पल्लवित होते हैं।

मिसेस शर्मा अपने अनुभव बताती हैं कि 'हॉस्टल' का नाम सुनते ही मेरे दिमाग में वहाँ की लड़कियों के बारे में अत्याधुनिक, फैशनपरस्त, मूडी और अपनी संस्कृति से कन्नी काटने वाली लड़कियों का ख्याल आता था इसीलिए अपनी बेटी को वहाँ भेजने के बाद हमेशा चिंतित रहती थी, किंतु अब लगता है कि छात्रावासी लड़कियों का अपना एक स्वतंत्र व्यक्तित्व होता है, जिसमें आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान, निर्णय क्षमता और आत्मज्ञान जैसे गुणों की बहुलता होती है। ये लड़कियाँ जीवन के हर क्षेत्र - एक बहन, बेटी, बहू, बीवी और माँ की भूमिका बड़ी सफलतापूर्वक निभाती हैं। वे स्वयं को एक सामाजिक प्राणी मानती हैं जिनके अपने सामाजिक उत्तरदायित्व भी हैं।

हॉस्टल में भी रहते हुए किसी साथी के कष्ट के समय हम उसे पूरा सहयोग, स्नेह और साथ देते हैं, जिससे उसे अकेलेपन का अहसास न हो कि वह घर से दूर है। इस तरह यहाँ प्रेम, सहयोग और साथ देते हैं, जिससे उसे अकेलेपन का अहसास न हो कि वह घर से दूर हो।
  अधिकांश लोगों की नजरों में हॉस्टल की छवि अच्छी नहीं होती है, क्योंकि कुछ 'हॉस्टल' अपने व्यवहार से अवश्य ही बुरी छवि बनाते हैं पर हॉस्टल आत्मनिर्भरता की प्रथम सीढ़ी है, जहाँ आत्मविश्वास, मिलनसारिता, सहयोग जैसे गुण पल्लवित होते हैं।      


इस तरह यहाँ प्रेम, सहयोग और पारस्परिक भाईचारे की भावना का जबर्दस्त विकास होता है। ये विचार हैं छात्रावासी क्षितिज के। मुखर व्यक्तित्व की धनी स्मृति कहती है छात्रावास में रहकर हमारे अंदर का डर और संकोच दूर हो जाते हैं। हम अकेले ही बाजार की खरीददारी, बैंक कार्य, यात्राएँ करना आदि छोटे से लेकर बड़े से बड़ा कार्य करना तक सीख जाते हैं, जबकि घर में रहकर सिर्फ घरेलू कार्यों में ही दक्ष हो पाते हैं और सबसे बड़ी बात तो हम निश्चित धनराशि में बजट बनाकर खर्च करना सीखते हैं जो हमें भविष्य में कितना सहायक सिद्ध होगा।

ऐसे ही अनुभवों का जिक्र करते हुए स्नेहा बताती है 'घर का आत्मीय वातावरण हमारी पराधीनता की कमजोरी को ढँके रहता है, जबकि हॉस्टल में यथार्थ के कठोर धरातल से सामना करना होता है, क्योंकि यहाँ किसी तरह का सहारा नहीं होता, अत: पराधीनता के स्थान पर आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन की दिशा में हॉस्टल का योगदान उल्लेखनीय है।'

छात्रावासी लड़कियों तथा लड़कों के बारे में कहा जाता है कि वे घर से दूर रहकर आत्मिक स्तर पर भी दूर हो जाते हैं तथा घर की जिम्मेदारी उठाने में अक्षम रहते हैं किंतु यह बात पूर्णतया सच नहीं हो सकती, क्योंकि घर से दूर रहने पर ही घर का महत्व पूरे दिलो-दिमाग से महसूस होता है। बल्कि हरेक छोटे-बड़े त्योहार, परंपराएँ वहाँ याद आती हैं और एक अलग ही जुड़ाव अनुभव होता है। मुझे हॉस्टल में मनाए गए त्योहार आज भी नहीं भूलते। वहाँ हरेक संस्कृति की लड़कियाँ सभी के साथ मिलकर त्योहार मनाती थीं।
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