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परिन्दे की फ़रयाद : इक़बाल
(1877-1938)

1. परिन्दे की फ़रयाद
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अगर कजरौ हैं अंजुम आसमाँ तेरा है या मेरा
मुझे फ़िक्रे जहाँ क्यूँ हो जहाँ तेरा है या मेरा

अगर हंगामए शौक़ से है लामकाँ ख़ाली
ख़ता किसकी है यारब लामकाँ तेरा है या मेरा

इसे सुबहे अज़ल इंकार की जुरअत हुई क्यूँकर
मुझे मालूम क्या वो राज़दाँ तेरा है या मेरा

मोहम्म्द भी तेरा, जिबरील भी क़ुरआन भी तेरा
मगर ये हर्फेशीरीं तरजुमाँ तेरा है या मेरा

इसी कोकब की ताबानी से है तेरा जहाँ रोशन
ज़वाले आदमे ख़ाकी ज़ियाँ तेरा है या मेरा
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