सत्ता का सेमीफाइनल : सत्ता का सेमीफाइनल कहलाने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा। राजस्थान में वसुंधरा राजे भाजपा को फिर सत्ता में नहीं ला सकीं। गुर्जर आंदोलन का खामियाजा उन्हें अपनी सत्ता खोकर चुकाना पड़ा। मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में शिवराज और रमनसिंह की सादगी और विकास कार्यों ने भाजपा को एकतरफा जीत दिलाई तो मिजोरम में 10 साल बाद फिर मतदाताओं ने कांग्रेस को मौका दिया। दिल्ली का दिल इस बार भी कांग्रेस की शीला दीक्षित ने जीत लिया। विजय मलहोत्रा 'सीएम इन वेटिंग' ही बने रहे।
लोकसभा चुनाव की कवायद में केन्द्र सरकार ने इस बार अपने पिटारे से किसानों और सरकारी कर्मचारियों के लिए सौगातें बाँटीं। किसानों को खुदकुशी से बचाने के लिए पैकेज की घोषणा की गई तो केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूर किया गया। हालाँकि सेना को सरकार खुश नहीं कर सकी।
इस साल पर्यावरण पर गंभीर चर्चा की गई, ग्रीन हाउस गैसों में कमी भी एक मुद्दा है, जो छोटा तो है, लेकिन अपने आप में बड़ा भी है और महत्त्वपूर्ण भी।
काकेशस क्राइसेस : जार्जिया पर रूस का हमला यूरेशिया में अमेरिकी और नाटो के बढ़ते प्रभाव से फैले तनाव की परिणिती रहा। 1992 से सुलग रही इस चिंगारी ने जॉर्जिया द्वारा दक्षिण ओसेतिया के अलगाववादियों को दबाने के लिए सैनिक भेजे जाने से भीषण आग का काम किया। इसके बाद रूस ने इसके खिलाफ तत्काल सैन्य कार्रवाई शुरू कर जॉर्जिया के सैनिकों को दक्षिण ओसेतिया में घुसने से रोक दिया और इस संघर्ष ने एक बार फिर शीतयुद्ध की सिहरन पैदा कर दी।
विज्ञान का महाप्रयोग : जिनेवा स्थित प्रयोगशाला सर्न ने पृथ्वी के महाविनाश की आशंकाओं के बीच धरती के भीतर 27 किलोमीटर लंबी सुरंग में 3.8 अरब डॉलर की लागत से बनी लार्ज हेड्रान कोलाइडर मशीन द्वारा ब्रह्मांड के रहस्यों का खुलासा करने के लिए प्रोटोन में टकराव करने के साथ ही दुनिया के सबसे बड़े प्रयोग का पहला महत्वपूर्ण परीक्षण संपन्न किया। वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति समझने की दिशा में यह बड़ा प्रयास साबित होगा। हालाँकि बाद में परिचालन में कुछ समस्याएँ आने से इस प्रयोग को टालना पड़ा।
नेपाल में 'लाल सलाम' : भारत के पड़ोस में नेपाल में माओवादियों की सरकार बनना हालाँकि विश्व के परिदृश्य में बहुत बड़ी घटना नहीं है, लेकिन नेपाल में लोकतंत्र की बहाली पूरी दुनिया की बड़ी और गौरवपूर्ण घटनाओं में से एक है। वहाँ के नरेश को हटाकर शांतिपूर्ण ढंग से संसदीय चुनाव कराना अपने आप में महत्वपूर्ण घटना रही है, पर भारत के पड़ोस में माओवादियों की बढ़ती ताकत भविष्य में सिरदर्द साबित हो सकती है। 'लाल गलियारे' का स्वप्न सँजो रहे माओवादी इसे परिवर्तन के रूप में देख रहे हैं।
मुशर्रफ की विदाई : पाकिस्तान में तानाशाही का अंत परवेज मुशर्रफ के सत्ता छोड़ने से हुआ। स्व. बेनजीर भूट्टो के पति आसिफ अली जरदारी मियाँ नवाज शराफ के समर्थन से पाकिस्तान के नए राष्ट्रपति चुने गए। हालाँकि नवाज शरीफ ने कुछ ही दिनों बाद अपना समर्थन वापस ले लिया। इस परिवर्तन का असर मोटे तौर पर यह रहा कि भारत में आतंकवादी हमलों में इजाफा हुआ और आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के नाम पर जरदारी ने नॉटो और अमेरिका से करोड़ों डॉलर ऐंठ लिए। बांग्लादेश में भी आपातकाल समाप्त हुआ और चुनाव होने की घोषणा की गई।
जल दस्युओं का आतंक : हिंद महासागर और अदन की खाड़ी में सोमालिया के समुद्री लुटेरों ने भी इस बार काफी आतंक मचाया। 9 महीनों में इन समुद्री दस्युओं ने 200 से अधिक अपहरण की वारदातें कर पूरी दुनिया के जहाजरानी उद्योग को चिंता में डाल रखा है।
समुद्री रास्ते से व्यापार करने वाले संगठनों का कहना है कि सोमालिया के समुद्रतट से परे इस समय समुद्री लुटेरे अभी भी कई जहाजों को बंधक बनाकर रखे हुए हैं, जिनमें तेल ढोने वाला एक महाकाय टैंकर भी शामिल है। भारतीय जलसेना को इस मामले में कार्रवाई के लिए शाबाशी के साथ-साथ विवाद का भी सामना करना पड़ा है।
कुल मिलाकर उथल-पुथल से भरा रहा साल 2008, जिसके खत्म होने में अभी भी कुछ दिन बाकी हैं। बहरहाल आने वाले साल का स्वागत नई रोशनी और उम्मीदों के साथ होगा। |