ऐसा है चलन जहर देना, गला दबाना, भूख, डुबा देना आदि। कुछ माँ-बाप तो पैदा होने के बाद भी बच्चियों को मार देते हैं। वे डॉक्टरों को रिश्वत देकर जाली मृत्यु प्रमाण पत्र भी हासिल कर लेते हैं। दरिंदगी तब चरम पर होती है, जब साक्ष्यों को छुपाने के लिए मौत के बाद इनकोजला दिया जाता है। बच्चियों को मारने का 80 फीसद कारण है, परिवार में दो लड़कियाँ पहले से होना।
विज्ञान से उलट नियम 2001 का राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण कहता है कि शिशु मृत्यु दर लड़कों की तुलना में लड़कियों की ज्यादा है। यह भारत में 43 प्रश अधिक है। यह नियम विज्ञान से उलट है। क्योंकि विज्ञान कहता है कि कमजोर से कमजोर स्थितियों में भी शिशु यदि लड़की है तो उसके बचने के आसार लड़के के मुकाबले ज्यादा होते हैं।
बचने वाली मोहताज यह विचित्र बात है कि जिन लड़कियों को मारा नहीं जाता है, उनके साथ बर्ताव दोयम दर्जे का किया जाता है। वे कुपोषण का शिकार हो जाती है। गाँवों में तो उन्हें उपेक्षित रखते ही है, लेकिन शहरों में भी ऐसा ही बर्ताव होता है।
चीन में ये हालात चीन में तो हजारों हजार लड़कियाँ छोड़ दी जाती हैं। कम उम्र में ही उन्हें घर से दूर छोड़ दिया जाता है। कई बार अनाथालय उन्हें अपना लेते हैं। ये पहले से ही इतने भरे हुए होते हैं कि 50 फीसद तो इनमें एक साल से कम में ही मर जाती है। भूख-प्यास से तड़पने के अलावाकई बार ये वहशियों का शिकार हो जाती हैं। चीन में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए एक बच्चे का परिवार का नारा दिया गया। देश में करीब 8 करोड़ परिवार ऐसे हैं, जिनमें एक बच्चा हुआ है और चाहे-अनचाहे इन परिवारों ने भी कभी गर्भपात कराया है। एशिया के कुछ इलाकों में तो स्थिति और भी भयावह है। लड़की को जन्म देने वाली माँ को ही सजा दी जाती है। कई बार उसे मार डाला जाता है। कारण है आर्थिक हालात और सामाजिक परेशानियाँ।
इनसे बँधी उम्मीद दरअसल भारत में उत्तराधिकार के मामले में अभी तक पुरुषों का वर्चस्व रहा। इसलिए पुराने लोग यह मानते रहे कि वंश के साथ-साथ संपत्ति का वारिस भी लड़का ही हो सकता है। परंतु हिन्दू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम 2005 में खेती की भूमि में हिन्दू महिलाओं के साथयह भेदभाव समाप्त कर दिया।
तो ये होंगे हालात यदि हालातों पर काबू नहीं किया गया तो अगले 20 साल में चीन और भारत में हालात बदतर हो जाएँगे। 12 से 15 प्रश पुरुष अनुपात के लिहाज से ज्यादा होंगे। 2015 से 2030 के बीच अकेले चीन में 2 करोड़ 50 लाख लोग पत्नियों की तलाश में बूढ़े हो जाएँगे। (वंदना अग्रवाल से बातचीत पर आधारित)
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